Aaj Ka Sona Chandi Bhav 2 February 2026: बजट के बाद सोने और चांदी की कीमतों में बड़ा बदलाव आया है. जानिए क्या है आज 2 फरवरी 2026 को गोल्ड और सिल्वर के ताजा रेट्स और निवेश का यह सही समय है या नहीं. The post बजट के बाद सोने-चांदी की कीमतों में बदलाव, जानें आज का भाव appeared first on Prabhat Khabar.
जैसलमेर जिले के बईया गांव की बुलंद आवाज व लोक संगीत के उस्ताद अनवर खां ने सुरों के बूते पर पद्मश्री का खिताब हासिल किया। अनवर खां ने यह साबित कर दिया कि रेगिस्तान की रेत के कणों में भी वह हुनर छिपा है जो पूरी दुनिया को मोहित करने की क्षमता रखता है। कला साधना के प्रति समर्पण ने ही उन्हें लोक कला के सरताज तक पहुंचाया। अब तक 55 देशों की 350 से अधिक यात्राएं कर चुके अनवर खां बॉलीवुड में पहचान बना चुके हैं। अनवर का बचपन संघर्ष में ही बीता। पिता रमजान खां चारपाई पर थे, घर में कोई कमाने वाला नहीं होने से रोजी-रोटी के लाले पड़ रहे थे। इस विकट स्थिति में अनवर ने तीसरी कक्षा में ही स्कूल छोड़ दिया। घर-घर जाकर अनाज मांगकर परिवार का पेट पालने का काम संभाला। कुछ ही साल बाद वर्ष 1975-76 में भीषण सूखा पड़ा। अन्न का संकट खड़ा हो गया। भूखे मरने की नौबत आ गई। इस स्थिति में हिम्मत नहीं हारी। अनवर ने जंगल में भुरट व तूंबे एकत्रित करने शुरू किए। फिर सुखाकर बीज निकाले। इसके बाद घरटी से खुद ही पीसकर मां को रोटी बनाने के लिए दिए। भुरट व तूंबे के बीज की रोटी खाकर वक्त गुजारा। 16 साल की उम्र में ऐसे संघर्ष में अनवर के कदम नहीं डगमगाए। बईया से 40 किमी पैदल चलकर मुंगेरिया या फिर फतेहगढ़ से बस पकड़ अनवर दूसरे गांवों में जाता था। यजमानों के घर शुभ अवसर पर गीतों की प्रस्तुतियां देकर शाम को दो वक्त की रोजी-रोटी के लिए अनाज लेकर आता था। छोटी उम्र में अनवर की बुलंद आवाज को क्षेत्र के प्रसिद्ध कलाकार सिद्दीक खां, छुगा खां, सांगर खां ने परखा। फिर वे अपने साथ कार्यक्रमों में ले जाने लगे। कुछ ही समय पर अनवर ने सुरों का ऐसा जादू बिखेरा कि हर कोई उसकी आवाज का मुरीद होने लगा। वक्त के साथ तकदीर बदली तो हालात भी धीरे-धीरे ठीक होने लगे। वर्ष 1980 में पहली बार अनवर को कलाकारों के साथ इंगलैंड आने का अवसर मिला। इसके बाद हर साल सात समंदर पार अनवर के सुर गूंजने लगे। लोक संगीत के लिए अनवर खां को नवंबर 2021 में राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने पद्मश्री से सम्मानित किया। अनवर खां का जन्म जैसलमेर के बईया गांव में रमजान खां के घर हुआ था। मांगणियार समुदाय की संगीत परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही एक मौखिक विरासत है, जहां कला ही जीवन का आधार और आजीविका का साधन है। उन्होंने बहुत कम उम्र में संगीत की बारीकियां सीखीं। उनकी आवाज़ में वह मिट्टी की सोंधी खुशबू जो सीधे दिल में उतर जाती है। उन्होंने न केवल पारंपरिक लोकगीतों, बल्कि कव्वाली, सूफी भजन, और कबीर व मीराबाई जैसे संतों के दोहों को भी अपनी प्रस्तुतियों में शामिल किया है। >विश्वभर में यात्रा: अपनी कला के जादू से अनवर खां ने अब तक 55 से अधिक देशों में प्रस्तुति दी है। उनकी आवाज और कमायचा/सारंगी का संगीत यूरोप, अमेरिका, और मध्य एशिया तक सुना गया। > सूफी और लोकगीत: अनवर खां केवल राजस्थानी लोकगीतों तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने कबीर, मीरा बाई, बुल्ले शाह और बाबा फरीद जैसे महान संतों की सूफी गायिकी को भी उतनी ही शिद्दत से गाया, जिससे उन्हें देश-विदेश में अपार लोकप्रियता मिली। >प्रतिष्ठित मंच: उन्होंने जोधपुर RIFF, वर्ल्ड सेक्रेट स्पिरिट फेस्टिवल, और कई अंतर्राष्ट्रीय फोक म्यूजिक फेस्टिवल में राजस्थान का प्रतिनिधित्व किया।
हाल ही में देश के विभिन्न हिस्सों में भूकंप के झटके महसूस हुए हैं, जिससे लोगों में डर बढ़ रहा है. इसी कड़ी में जम्मू-कश्मीर की कश्मीर घाटी में सोमवार सुबह 4.8 तीव्रता का भूकंप आया. इसका केंद्र हंजीवेरा में 10 किमी गहराई पर था.
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