नयी दिल्ली, 29 अप्रैल (भाषा) केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने उच्च एथनॉल मिश्रण और वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग का दायरा बढ़ाने के लिए वाहन उत्सर्जन नियमों में संशोधन का प्रस्ताव किया है। इस कदम से सभी वाहन श्रेणियों में फ्लेक्स-फ्यूल और शुद्ध बायोफ्यूल वाहनों के इस्तेमाल की राह आसान होगी। केंद्रीय मोटर वाहन [...]
औरैया में सिस्टम की लापरवाही से एक बेटी इलाज के लिए पिता परेशान है। एक गरीब परिवार के मुखिया और तीन बेटियों को राशन कार्ड में मृत दिखा दिया गया। इससे गंभीर बीमारी से जूझ रही एक बेटी का इलाज बंद हो गया। पिता एक छोटी दुकान चलाकर गुजर बसर करते हैं। बेटी की दवा के लिए हर माह 40 हजार रुपए जुटाना मुश्किल हो रहा है। दवा न मिलने पर बेटी को तड़पता देख माता-पिता भी रो देते हैं, लेकिन सिस्टम है कि कुछ सुनने और देखने को तैयार ही नहीं है। एस साल से जिला खाद्य पूर्ति अधिकारी कार्यालय के चक्कर काटकर परेशान हो गए, लेकिन वह खुद को और अपनी बेटियों को कागज में जीवित नहीं करा पा रहे। अब पूरा मामला जानिए... पूरा मामला दिबियापुर के राणा नगर का है। राजीव कुमार प्रजापति की राजीव की तीन बेटियां है। साल 2004 को परिवार कि जिंदगी में पहाड़ टूट पड़ा, जिसका दर्द वह आज तक झेल रहे हैं। राजीव की दूसरे नंबर की बेटी स्वाती खेलते हुए छत से गिर गई। इससे वह पैरालिसिस की शिकार हो है। सब कुछ बेचकर इलाज कराया तब कहीं बेटी की हालत कुछ ठीक हुई, लेकिन पैरालिसिस के कारण एक हाथ काम नहीं करता और एक पैर में दिक्कत है। अचानक दौरे आने से वह गिर जाती है। इसके बाद राजीव अपनी बेटी को लेकर दिल्ली के एम्स में गए और गरीबी का हवाला दिया। इससे उन्हें पात्र गृहस्थी के राशन कार्ड से उन्हें निःशुल्क दवाएं मिलने लगीं, जिनकी बाजार में कीमत 40 से 50 हजार रुपये तक है। राजीव को राहत मिली और घर के बजट से रुपये निकालकर बेटी को पढ़ाया। राजीव को जिंदगी ने जो दर्द दिया वह धीरे धीरे ठीक हो रहा था, लेकिन सिस्टम ने फिर ऐसी मार दी कि राजीव का परिवार फिर से संकट में आ गया। मार्च 2025 में खाद्य एवं रसद विभाग ने राशन कार्ड में राजीव और उनकी दो बेटियों का नाम काटकर उन्हें मृत दिखा दिया। अब बेटी के मृत दिखने पर एम्स से निःशुल्क दवाएं मिलना बंद हो गईं। अब राजीव खुद व बेटी को जिंदा दिखाने को विभाग के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन खुद को जीवित नहीं दिखा पा रहे हैं। बेटी की तड़प माता पिता देख नहीं पाते। साल भर से हर महीने 40 से 50 हजार की दवा खरीद-खरीदकर अब नौबत मकान बिकने की आ गई है। मां सुमन देवी बताती हैं कि बेटी को तड़पता देख रोने के अलावा कुछ नहीं कर पाते। पिता राजीव बताते हैं कि वह साल भर से चक्कर काट रहे हैं, लेकिन खुद की जीवित नहीं दिखा पा रहे हैं। सिस्टम और सरकार से उम्मीद टूट गई है अब भगवान पर ही भरोसा है। जिला पूर्ति अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि यह तकनीकी त्रुटि है जिसे सुधारने की कोशिश की जा रही है।
चिंतपूर्णी के भरवाईं क्षेत्र में एक कार गहरी खाई में गिरकर आग की चपेट में आ गई। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक वाहन में सवार चार लोगों के जिंदा जलने की आशंका जताई जा रही है
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