Rice Soaking and Cleaning Tips: चावल बनाने से पहले इसे पानी से साफ किया जाता है। लेकिन इसका सही तरीका पता होना जरूरी है। सही तरीके से साफ किए गए चावल फूले और खिले-खिले बनते हैं।
गोपालगंज। जिले के विजयीपुर थाना क्षेत्र के एक गांव से मानवता को शर्मसार करने वाली वारदात सामने आई है, जहां एक 17 साल की नाबालिग लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म...
ग्वालियर जिले के बेहट थाना क्षेत्र से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या को फिर चर्चा में ला दिया है। बेनीपुरा गांव में एक 6 वर्षीय मासूम पर आवारा कुत्ते ने हमला कर दिया। हमले में बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया और उसके चेहरे पर गहरे जख्म आ गए। घटना के बाद परिवार में अफरा-तफरी मच गई और गांव के लोगों में डर का माहौल बन गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बच्चा अपने घर के बाहर खेल रहा था। इसी दौरान एक आवारा कुत्ता उसकी तरफ दौड़ा और हमला कर दिया। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत हस्तक्षेप कर बच्चे को बचाया, लेकिन तब तक उसे गंभीर चोटें लग चुकी थीं। घायल बच्चे को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी हालत को देखते हुए तत्काल सर्जरी करने का फैसला लिया। आवारा कुत्ता हमला: डॉक्टरों के सामने थी बड़ी चुनौती सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती बच्चे की स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम बनाई गई। कुत्ते के हमले में चेहरे का बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ था। डॉक्टरों के अनुसार सबसे ज्यादा नुकसान होंठ और चेहरे के आसपास के हिस्से में हुआ, जिसे सामान्य आकार में लाना आसान नहीं था। करीब दो घंटे तक चली सर्जरी में 100 से अधिक टांके लगाए गए। संक्रमण के खतरे को देखते हुए बच्चे को एंटी रैबीज इंजेक्शन और जरूरी दवाएं भी दी गईं। डॉक्टरों का कहना है कि फिलहाल बच्चे की हालत स्थिर है, लेकिन पूरी तरह ठीक होने में समय लग सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, कुत्ते के काटने के मामलों में समय पर इलाज बेहद जरूरी होता है। थोड़ी सी लापरवाही भी गंभीर संक्रमण का कारण बन सकती है। यही वजह है कि ऐसे मामलों में तुरंत अस्पताल पहुंचना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार पूरा इलाज कराना जरूरी माना जाता है। ग्वालियर में आवारा कुत्तों का आतंक, कार्रवाई की मांग तेज इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में काफी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में लंबे समय से आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ रही है। कई बार बच्चों और बुजुर्गों पर हमले की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि आवारा पशुओं और कुत्तों को नियंत्रित करने के लिए चलाए जाने वाले अभियान जमीन पर प्रभावी नजर नहीं आते। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते निगरानी और नियंत्रण की व्यवस्था मजबूत की जाती, तो इस तरह की घटना टाली जा सकती थी। विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ कुत्तों को पकड़ना ही समाधान नहीं है। नसबंदी, टीकाकरण, कचरा प्रबंधन और नियमित निगरानी जैसी व्यवस्थाओं को भी मजबूत करना होगा। तेजी से बढ़ते शहरी और ग्रामीण विस्तार के बीच आवारा कुत्तों की समस्या कई शहरों में चुनौती बन चुकी है। फिलहाल पूरा गांव मासूम के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहा है। वहीं इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर लोगों, खासकर बच्चों की सुरक्षा के लिए आवारा कुत्तों की समस्या पर कब तक प्रभावी और स्थायी कदम उठाए जाएंगे।
Indian News 20 द्वारा इस दिन पोस्ट की गई रविवार, 13 दिसंबर 2020
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