12 वीं के बाद अगर आप भी आर्किटेक्ट बनना चाहते हैं, तो एक बार इन कोर्स के बारे में जान लीजिए.
दक्षिण भारतीय अभिनेता विजय देवरकोंडा 26 जनवरी को अपनी आगामी बहुप्रतीक्षित फिल्म के टाइटल की घोषणा करेंगे, जिसका एक पोस्टर भी रिलीज किया गया है।
मैं एक ऐसे शख्स को जानता था, जिन्होंने अपनी सर्विस के दौरान राजसी जीवन जिया। अपनी तीन बेटियों की शादी करवाई और उन्हें अच्छी तरह से बसाया। कुछ ही सालों में उनकी बेटियां उनसे भी ज्यादा धनवान हो गईं। 27 साल पहले रिटायर होने के बाद वे बेहद संयमी खर्च करने लगे। जो हर साल कम से कम 5 विदेशी यात्राएं करते थे, रिटायरमेंट के बाद देश में भी कम ही घूमे। उनके लिए बैंक और निवेश में रखा पैसा ही अमीरी का एहसास देता था, लेकिन उन्होंने कभी अपने जीवन भर की जमा-पूंजी का आनंद नहीं लिया। उनके लिए पैसा सुरक्षा का प्रतीक था, न कि आराम या दिखावे का। उनका मानना था कि भविष्य की सुरक्षा के लिए बचत ही सबसे बड़ा सहारा है। उनकी पत्नी के निधन के बाद मैं उनका देखभाल करने लगा और उनसे यह भी सीखा कि कैसे बचत और निवेश को भविष्य की अनुमानित महंगाई से मेल खाने के लिए हर साल बढ़ाना चाहिए। उनके पास शेयर, बॉन्ड, म्युचूअल फंड, फिक्सड डिपॉजिट और नकद जैसी कई संपत्तियां थीं, फिर भी वे अपने ऊपर जरूरी चीजों के अलावा कुछ भी खर्च नहीं करते थे। हाल ही में उनका निधन हुआ और उन्होंने अपने बच्चों के लिए काफी कुछ छोड़ा है, जिनका कहना है, ‘जब उनके पास इतना पैसा था तो वे ऐसे क्यों रहे? हमें तो पता भी नहीं था।’ बच्चों के लिए कुछ छोड़ना ठीक है, लेकिन अपने जाने के बाद बड़ा हिस्सा रखना सबसे बड़ी भूल है।मान लीजिए रिटायरमेंट कॉर्पस एक करोड़ रुपए है और इस पर औसतन 8% का रिटर्न मिलता है, तो यह हर साल आठ लाख रुपए की आय देगा। अगर आपके घरेलू खर्च महीने का एक लाख रुपए है, तो आपको करीब डेढ़ करोड़ रुपए का कॉर्पस रखना होगा।अगर कॉर्पस तीन करोड़ रुपए है, तो पति‐पत्नी मिलकर साल में चौबीस लाख रुपए खर्च कर सकते हैं, जो मुंबई जैसे महानगर में कुछ यात्राओं और अचानक होने वाली मेडिकल जरूरतों के साथ सेमी लग्जरी लाइफ के लिए पर्याप्त है। छोटे शहर में रहेंगे तो निकासी कम होगी, जिससे महंगाई का असर भी कम पड़ेगा। मेडिकल इंश्योरेंस जरूरी है, क्योंकि इसकी कमी से कॉर्पस जल्दी खत्म हो सकता है। मैनेजमेंट टिप: मेहनत से कमाए गए पैसे का बड़ा हिस्सा अपने जीवन के बाद के लिए न छोड़ें; अपने मेहनत की कमाई से जीवन का आनंद लेना भी एक तरह का निवेश है। यह दिखाता है कि आपने रिटायरमेंट का जीवन ठीक से नहीं जिया। आपने रिटायरमेंट का आनंद लेने के लिए मेहनत की है, खुद को इस आनंद से वंचित रखें।
Indian News 20 द्वारा इस दिन पोस्ट की गई रविवार, 13 दिसंबर 2020
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