THIRUVANANTHAPURAM तिरुवनंतपुरम: राज्य सरकार ने आदेश दिया है कि राज्य में माइनॉरिटी-स्टेटस वाले एडेड स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति और प्रमोशन के लिए K-TET क्वालिफिकेशन ज़रूरी नहीं है। यह पहली बार...
कटिहार के मनिहारी गंगा तट पर नमामि गंगे परियोजना के तहत लगभग नौ करोड़ रुपए की लागत से निर्माणाधीन रिवर फ्रंट का कार्य निर्धारित समय सीमा के बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। यह रिवर फ्रंट ऐसी भूमि पर बनाया गया है जिसे वर्षों से गंगा के कटाव से प्रभावित माना जाता रहा है। अब गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण निर्माणाधीन रिवर फ्रंट चारों ओर से बाढ़ के पानी से घिर गया है, और इसे बचाने के लिए करोड़ों रुपये अतिरिक्त खर्च किए जा रहे हैं। कटाव की स्थिति को देखते हुए बाढ़ नियंत्रण विभाग, कटिहार द्वारा रिवर फ्रंट को बचाने के लिए कटावरोधी (एनसी) बांध और फ्लड फाइटिंग का कार्य कराया जा रहा है। इस स्थिति पर स्थानीय लोगों ने सरकारी राशि के उपयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि परियोजना की स्वीकृति से पहले स्थल का तकनीकी सर्वेक्षण और कटाव की स्थिति का आकलन किया जाना चाहिए था। निर्माणाधीन ढांचे को बचाने में करोड़ों हो रहे खर्च स्थानीय निवासियों ने इस बात पर जोर दिया कि जिस भूमि को लगातार कटाव प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाना जाता रहा है, वहां इतनी बड़ी परियोजना को मंजूरी देने में दूरदर्शिता की कमी रही। अब निर्माणाधीन ढांचे को बचाने के लिए अलग से करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जो सरकारी धन का दुरुपयोग है। स्थानीय निवासी रंजीत गुप्ता ने कहा, "यदि शुरुआत में स्थल का सही सर्वेक्षण और तकनीकी जांच हुई होती तो अतिरिक्त राशि खर्च करने की नौबत नहीं आती। प्रीतम ओझा ने टिप्पणी की, "सरकारी धन का उपयोग पारदर्शिता और दूरदर्शिता के साथ होना चाहिए।" वहीं, सीमा देवी ने बताया कि गंगा का जलस्तर हर वर्ष बढ़ता है और यह क्षेत्र कटाव प्रभावित रहा है, इसलिए योजना स्वीकृत करते समय सभी पहलुओं का आकलन आवश्यक था। स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की तकनीकी जांच कराने और कटाव प्रभावित भूमि पर रिवर फ्रंट निर्माण की स्वीकृति के आधार को सार्वजनिक करने की मांग की है। विभाग ने फ्लड फाइटिंग का कराया कार्य इस संबंध में, जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने कहा कि रिवर फ्रंट का निर्माण विभाग की तकनीकी टीम द्वारा किए गए आकलन के आधार पर हुआ है। उन्होंने तकनीकी विषय पर टिप्पणी करने से इनकार किया। डीएम ने बताया कि कटाव की स्थिति को देखते हुए बुडको और जल संसाधन विभाग से बात की गई थी, जिसके बाद दोनों विभागों ने फ्लड फाइटिंग का कार्य कराया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद यहां ठोस कार्य कराया जाएगा।
मुल्तान की डोली रोटी करीब 100 साल पुरानी ऐसी परंपरा है, जिसे कभी दुल्हन की डोली के साथ बारात के सफर के लिए रखा जाता था. आज भी इस खास रोटी का स्वाद लोगों को पुरानी यादों और भारत-पाकिस्तान की साझा संस्कृति से जोड़ता है.
Indian News 20 द्वारा इस दिन पोस्ट की गई रविवार, 13 दिसंबर 2020
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