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घर पर आसानी से उगा लें लेमन ग्रास, इस तरह लगाएं गमले में पौधा

How To Grow Lemongrass Plant: लेमनग्रास खुशबूदार पौधा है इसे आप घर पर आसानी से उगा सकते हैं. आइए स्टेप बाए स्टेप जानते हैं लेमनग्रास पौधा उगाने का तरीका.

पीटर सिंगर का कॉलम:जिम्मेदार लोग ही अवैज्ञानिक बातें करेंगे तो क्या होगा?

2025 में अमेरिका में खसरे से दो बच्चों समेत तीन लोगों की मौत हो गई। ये मौतें टाली जा सकती थीं। पिछले साल अमेरिका में खसरे के 2267 मामलों की पुष्टि हुई, जो 2024 के 285 मामलों से सात गुना से ज्यादा हैं और पिछले 30 वर्षों में सबसे अधिक है। ये सारे मामले टाले जा सकते थे। तो ऐसा हुआ क्यों नहीं? पिछली फरवरी में ही अमेरिकी हेल्थ एंड ह्यूमन सर्विस विभाग के सेक्रेटरी बनाए गए रॉबर्ट एफ. कैनेडी जूनियर बीते दो दशकों से वैक्सीन को ऑटिज्म से जोडने वाली बेबुनियाद थ्योरियों को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि वैक्सीन ने ‘अमेरिकी बच्चों की पूरी पीढ़ी को जहर दे दिया है।’ उनके ऐसे गैर-जिम्मेदार बयानों से ही अमेरिका में वैक्सीनेशन की दर घटी और नतीजतन खसरे के मामले तेजी से बढ़े। पद संभालते ही कैनेडी ने एक प्रमुख वैक्सीन एडवाइजरी कमेटी से अनुभवी वैज्ञानिकों को हटाकर उनकी जगह वैक्सीन-विरोधी बैठा दिए। एम-आरएनए वैक्सीन डेवलपमेंट के लिए दी जा रही फंडिंग भी वापस ले ली। यह वही तकनीक है, जिससे कोविड-19 के खिलाफ बेहद कारगर वैक्सीनों का तेजी से निर्माण संभव हो पाया था और लाखों जानें बच पाई थीं। कैनेडी ने ही खसरे के वैक्सीनेशन के विकल्प के तौर पर विटामिन-ए लेने का सुझाव दिया। इसके बाद टेक्सास में कुछ पैरेंट्स ने बच्चों को इतना विटामिन-ए दे दिया कि उनमें विषाक्तता के लक्षण दिखने लगे। जन-स्वास्थ्य को लेकर वैज्ञानिक मानकों से मुंह मोड़ने की समस्या केवल अमेरिका में ही नहीं है। स्लोवाकिया में प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको ने ऑर्थोपेडिक सर्जन और वैक्सीन विरोधी एक्टिविस्ट पीटर कोटलार को महामारी से निपटने की जांच के लिए नियुक्त किया था। अक्टूबर 2024 की रिपोर्ट में कोटलार ने कोविड-19 को ‘एक्ट ऑफ बायो-टेररिज्म’ बताया। बिना किसी सबूत के रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि एम-आरएनए वैक्सीन मानव डीएनए को बदल देती हैं। एक स्वतंत्र समाज में लोग वैक्सीन के बारे में अपनी निराधार राय रख सकते हैं, वैज्ञानिक उनका खंडन कर सकते हैं और जन-स्वास्थ्य अधिकारी साक्ष्यों की जांच कर उचित कदम उठा सकते हैं। दुर्लभ मामलों में ही ऐसा होता है कि वैज्ञानिक सहमति के खिलाफ आए विचार सच साबित होते हों। वैक्सीनें इतिहास के सबसे जांचे-परखे मेडिकल हस्तक्षेपों में से एक हैं, फिर भी कैनेडी जैसे लोग और अधिक अध्ययनों की मांग करते हैं। जबकि अपने दावों के समर्थन में वे किस्सों, सिलेक्टिव आंकड़ों और दवा कंपनियों के बारे में षडयंत्रपूर्ण थ्योरियों को भी सच मान लेते हैं। जब वैक्सीनेशन कवरेज जरूरी सीमा से नीचे गिर जाता है तो ‘हर्ड इम्युनिटी’- यानी आम आबादी में उच्च वैक्सीनेशन दर के कारण जोखिमपूर्ण आबादी को मिलने वाली सुरक्षा खत्म हो जाती है और रोकी जा सकने वाली बीमारियां भी लौट आती हैं। ऐतिहासिक दृष्टांतों और रोमानिया व कनाडा के उदाहरणों से हम यह बात समझ भी चुके हैं, जहां खसरे को समाप्त मान लिया गया था। रोमानिया में साम्यवादी शासन के दौरान वैक्सीनेशन अनिवार्य था और खसरा खत्म हो चुका था। चाउशेस्कु की तानाशाही के पतन से आजादी मिली और यूरोपियन यूनियन की सदस्यता मिलने से लोगों का जीवन-स्तर भी सुधरा, लेकिन कुछ वैक्सीन लगवाना स्वैच्छिक कर दिया गया। नतीजा ये रहा कि 2023 तक रोमानिया में खसरा वैक्सीनेशन दर 95% से घटकर 62% ही रह गई। 2024 में वहां खसरे के 30 हजार से ज्यादा मामले सामने आए, 23 मौतें भी हुईं। कुछ अधिकारी कहते हैं कि वे व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सम्मान कर रहे हैं। लेकिन दूसरों को नुकसान पहुंचाने के जोखिम पर यह आजादी नहीं दी जा सकती। वैक्सीनेशन से इनकार ठीक ऐसा ही करना है। जब अधिकारी वैक्सीन को लेकर निराधार धारणाओं पर नीतियां बनाते हैं, तो खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ता है। टेक्सास में यही हुआ। इसकी जिम्मेदारी उन्हीं लोगों पर है, ​जिनके पास स्वास्थ्य-नीति बनाने की ताकत है। (@प्रोजेक्ट सिंडिकेट)

Best Cancer Hospital in Delhi: एम्स से राजीव गांधी अस्पताल तक, ये हैं दिल्ली के सबसे भरोसेमंद कैंसर अस्पताल; जानें सुविधाएं

Top Cancer Hospitals in Delhi: भारत में कैंसर आज एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर प्रिवेंशन एंड रिसर्च (NICPR) के अनुसार, वर्ष 2022 में देश में लगभग 14,61,427 नए कैंसर मामलों का अनुमान लगाया गया था. TOI की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कैंसर तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है. हर साल करीब 15 लाख नए मामले सामने आ रहे हैं और आने वाले दशकों में यह संख्या और बढ़ने की आशंका है. कैंसर मामलों के लिहाज से भारत अब चीन और अमेरिका के बाद दुनिया में तीसरे स्थान पर है. चलिए आपको दिल्ली के कुछ फेमस कैंसर के अस्पतालों के बारे में बताते हैं. AIIMS AIIMS देश का सबसे प्रतिष्ठित सरकारी अस्पताल माना जाता है. इसका ऑन्कोलॉजी विभाग अत्याधुनिक रेडियोथेरेपी और रेडियो डायग्नोस्टिक मशीनों से लैस है. यहां स्टीरियोटैक्टिक रेडियोथेरेपी, आधुनिक लीनियर एक्सेलेरेटर और ब्रैकीथेरेपी जैसी एडवांस तकनीकें उपलब्ध हैं. भारत में पहली बार यहां वैक्यूम-असिस्टेड एडवांस्ड मैमोग्राफी यूनिट की शुरुआत की गई, जो स्टीरियोटैक्टिक ब्रेस्ट बायोप्सी में मददगार है. इसके अलावा, अस्पताल में हीमेटोपोएटिक स्टेम सेल बोन मैरो ट्रांसप्लांट कार्यक्रम भी सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है. शुरुआती चरण में कैंसर की पहचान के लिए यहां प्रिवेंटिव ऑन्कोलॉजी और स्क्रीनिंग प्रोग्राम भी चलाया जाता है.BLK सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालBLK सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल दिल्ली के प्रमुख निजी कैंसर अस्पतालों में गिना जाता है. यहां सर्जिकल, मेडिकल और रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट की अनुभवी टीम मिलकर मरीजों को व्यक्तिगत देखभाल प्रदान करती है. अस्पताल में आधुनिक तकनीक और विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिससे कैंसर की पहचान और उपचार अधिक सटीक और प्रभावी हो पाता है. यहां मरीजों को कैंसर उपचार की पूरी सुविधा एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराई जाती है.राजीव गांधी कैंसर अस्पतालइंद्रप्रस्थ कैंसर सोसायटी एंड रिसर्च सेंटर द्वारा संचालित यह अस्पताल 1994 में स्थापित हुआ था. आज यह एशिया के प्रमुख कैंसर केंद्रों में शुमार है. NABH और NABL से मान्यता प्राप्त यह संस्थान मेडिकल, सर्जिकल और रेडिएशन ऑन्कोलॉजी की विशेष सेवाएं प्रदान करता है. यहां स्वतंत्र बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट है, जहां स्टेम सेल और अनरिलेटेड डोनर ट्रांसप्लांट जैसी उन्नत प्रक्रियाएं की जाती हैं.धरमशिला नारायणा सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालदिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में स्थित यह अस्पताल दो दशक से अधिक समय से कैंसर उपचार में अग्रणी रहा है. 2017 में नारायणा हेल्थ नेटवर्क से जुड़ने के बाद यहां मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग और अधिक मजबूत हुआ. अस्पताल में कीमोथेरेपी, हार्मोनल थेरेपी, बायोलॉजिकल और टार्गेटेड थेरेपी जैसी सेवाएं एक्सपर्ट डॉक्टरों की निगरानी में दी जाती हैं.एक्शन कैंसर अस्पतालपश्चिमी दिल्ली के केंद्र में स्थित एक्शन कैंसर अस्पताल आधुनिक सुविधाओं से लैस कैंसर केयर सेंटर है. यहां मरीजों को अत्याधुनिक तकनीक और अनुभवी एक्सपर्ट की देखरेख में उपचार उपलब्ध कराया जाता है.यहां अफगानिस्तान, नाइजीरिया, केन्या, तंजानिया, इराक और नेपाल जैसे तमाम देशों के लोग इलाज कराने के लिए आते हैं. इसे भी पढ़ें: Harmful Morning Habits: सुबह उठते ही करते हैं ये काम तो घट रही है आपकी उम्र, जानें अपनी गलत आदतेंDisclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

John Doe

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