मुंबई, 28 अगस्त (आईएएनएस)। अभिनेत्री अनुष्का रंजन ने हाल ही में अपने पति आदित्य सील के साथ जुड़वां बेटियों का स्वागत किया है। उन्होंने अपनी गर्भावस्था के दौरान हुए अहसास और इससे मानव शरीर के बारे में उनकी समझ कैसे बढ़ी, इस बारे में बात की है।
आजमगढ़ में धान के खेत में आसमानी बिजली गिर गई है। इस हादसे में 1 महिला की मौत हो गई। आकाशीय बिजली की चपेट में आने से 6 अन्य महिलाएं भी झुलस गई हैं।
फिटनेस की दुनिया में महिलाओं को अक्सर हल्की कसरत और सीमित वजन तक ही जोड़कर देखा जाता है, लेकिन प्रबलिन कौर गिल ने इस सोच को अपने प्रदर्शन से चुनौती दी है. एशिया की नंबर-1 स्ट्रीटलिफ्टर और कैलिस्थेनिक्स एथलीट के रूप में पहचान बना चुकीं प्रबलिन की कहानी केवल पदक और प्रतियोगिताओं तक सीमित नहीं है. उनके लिए फिटनेस जीवन को दोबारा दिशा देने, मानसिक मजबूती हासिल करने और अपने शरीर पर नियंत्रण विकसित करने का माध्यम बनी. हिंदुस्तान टाइम्स लाइफस्टाइल को दिए विशेष साक्षात्कार में प्रबलिन ने अपनी फिटनेस यात्रा, प्रतियोगिताओं की तैयारी, चोट के बाद वापसी, पोषण और महिलाओं के लिए ताकत बढ़ाने वाली कसरत की जरूरत पर खुलकर बात की. उनका कहना है कि आज भी महिलाओं में भारी वजन उठाने को लेकर कई तरह की गलत धारणाएं मौजूद हैं, जबकि ताकत बढ़ाने वाली कसरत उम्र बढ़ने के साथ स्वस्थ और आत्मनिर्भर जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है. एक घटना ने बदल दी जिंदगी प्रबलिन के लिए फिटनेस की शुरुआत किसी प्रतियोगिता को जीतने के उद्देश्य से नहीं हुई थी. उन्होंने बताया कि उनकी जिंदगी में एक ऐसा दौर आया जब उन्हें महसूस हुआ कि वह जिस तरह का जीवन जी रही हैं, उसे बदलना जरूरी है. एक रात अत्यधिक शराब पीने के बाद जब उनकी मां को उन्हें कपड़े बदलने में मदद करनी पड़ी, तो यह घटना उनके लिए बेहद शर्मिंदगी और आत्ममंथन का कारण बनी. प्रबलिन ने बताया कि वह क्षण उनके जीवन का सबसे अपराधबोध वाला समय था. उन्होंने खुद से कहा कि उनकी मां ने उन्हें इस तरह का जीवन जीने के लिए जन्म नहीं दिया है. इसके बाद उन्होंने अपनी जिंदगी को नए सिरे से बनाने का फैसला किया. शुरुआत में उनका लक्ष्य बहुत बड़ा नहीं था. वह रोज अपने शरीर के लिए कुछ करने और नियमित रूप से अभ्यास करने के संकल्प के साथ आगे बढ़ीं. धीरे-धीरे व्यायाम उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया और सामाजिक माध्यमों पर मिलने वाले लोगों के समर्थन ने भी उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. ताकत बढ़ाने से कैलिस्थेनिक्स तक का सफर प्रबलिन ने शुरुआत ताकत बढ़ाने वाली कसरत से की थी. बाद में एक दोस्त ने उन्हें कैलिस्थेनिक्स से परिचित कराया. शरीर के वजन और नियंत्रित गतिविधियों पर आधारित इस अभ्यास ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि उन्होंने इसे लगातार जारी रखा. उनके मुताबिक कैलिस्थेनिक्स उन्हें ध्यान जैसा महसूस होता था. इसमें हर अगला स्तर पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता है और इसी वजह से लगातार कुछ नया सीखने तथा अपनी क्षमता को आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिलती रहती है. यहीं से उनकी यात्रा सामान्य फिटनेस से प्रतिस्पर्धी खेल की ओर बढ़ी. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए उपलब्धि के साथ जिम्मेदारी भी है. उनका कहना है कि वह हमेशा देश के लिए कुछ करना चाहती थीं और आज जब उन्हें एक एथलीट के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिलता है तो उन्हें गर्व के साथ जिम्मेदारी का भी एहसास होता है. उपलब्धियों के पीछे छिपी चोट और संघर्ष किसी भी खिलाड़ी की सफलता के पीछे केवल मंच पर दिखाई देने वाला प्रदर्शन नहीं होता. प्रबलिन ने बताया कि लोग अक्सर एथलीट की सफलता और आत्मविश्वास को देखते हैं, लेकिन उसके पीछे की असफलताओं और मानसिक संघर्षों को नहीं देख पाते. करीब दो साल पहले उनका टखना टूट गया था. चोट के बाद शारीरिक रूप से वापस लौटना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन उससे भी बड़ी चुनौती मानसिक रूप से खुद को संभालना था. उन्होंने बताया कि उन्होंने शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर संघर्ष करते हुए वापसी की और आज जिस मुकाम पर हैं, वहां तक पहुंचीं. उनके मुताबिक लोग उनकी आत्मविश्वास से भरी तस्वीर देखते हैं, लेकिन यह आत्मविश्वास अचानक पैदा नहीं हुआ. कठिन परिस्थितियों से लड़ते हुए उन्होंने खुद को मजबूत बनाया है. महिलाओं को भारी वजन उठाने से डरना नहीं चाहिए प्रबलिन का मानना है कि महिलाओं के बीच ताकत बढ़ाने वाली कसरत को लेकर जागरूकता अभी भी पर्याप्त नहीं है. उनके अनुसार दुनिया धीरे-धीरे इसके महत्व को समझ रही है, लेकिन महिलाओं के लिए इसे लेकर बनी कई पुरानी धारणाएं अब भी मौजूद हैं. वह मानती हैं कि ताकत बढ़ाने वाली कसरत केवल शरीर का आकार बदलने या मांसपेशियां बनाने तक सीमित नहीं है. उम्र बढ़ने के साथ शरीर को संतुलित रखने, अपने शरीर पर नियंत्रण बनाए रखने और रोजमर्रा के कामों को बेहतर तरीके से करने में भी ताकत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. प्रबलिन इसे जीवन के लिए जरूरी कौशल तक मानती हैं. उनके अनुसार शरीर को नियंत्रित करना, संतुलन बनाना और अपनी शारीरिक क्षमता का प्रभावी इस्तेमाल करना ऐसी क्षमताएं हैं जो जीवन के अलग-अलग चरणों में काम आती हैं. स्कूलों की शारीरिक शिक्षा में बदलाव की जरूरत प्रबलिन ने शारीरिक शिक्षा की मौजूदा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए. उनका कहना है कि स्कूलों में बच्चों को जिस तरह की शारीरिक शिक्षा दी जाती है, वह वास्तविक जरूरतों से काफी दूर है. उनके अनुसार विद्यार्थियों को केवल व्यायाम कराना पर्याप्त नहीं है. उन्हें यह भी समझाया जाना चाहिए कि किसी कसरत को क्यों किया जा रहा है, शरीर पर उसका क्या प्रभाव पड़ता है और प्रतिरोध आधारित प्रशिक्षण किस तरह शरीर को मजबूत बना सकता है. वह चाहती हैं कि शारीरिक गतिविधि को केवल एक अतिरिक्त गतिविधि के रूप में देखने के बजाय उसके पीछे के विज्ञान और उद्देश्य को भी समझाया जाए. इससे बच्चों और युवाओं में व्यायाम को लेकर अधिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित हो सकता है. प्रबलिन कौर गिल की यात्रा इस बात का उदाहरण है कि फिटनेस केवल बाहरी बदलाव का माध्यम नहीं है. अनुशासन, निरंतर अभ्यास, चोट के बाद वापसी और मानसिक दृढ़ता ने उन्हें उस मुकाम तक पहुंचाया जहां आज वह एशिया की शीर्ष स्ट्रीटलिफ्टर के रूप में पहचानी जाती हैं. उनकी कहानी खास तौर पर महिलाओं के लिए यह संदेश देती है कि शरीर की ताकत बढ़ाना केवल खेल या प्रतियोगिता की जरूरत नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है.
Indian News 20 द्वारा इस दिन पोस्ट की गई रविवार, 13 दिसंबर 2020
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