सार्वजनिक जीवन में ऐसा होता ही रहता है कि मित्र कब शत्रु बन जाए और शत्रु कब मित्र बन जाए। जिन्हें जीवन में बड़े लक्ष्य पूरे करने हों, उन्हें यह बात ध्यान रखनी होगी कि अब स्थायी संबंधों का समय समाप्त हो रहा है। जो आज आपका है, कल हो सकता है विरोध में दिखे, वहीं विरोधी कभी भी समर्थन दे सकता है। संत कह गए हैं- समय फिरे रिपु होई पीरिते। समय बदलता है तो रिपु यानी शत्रु भी पीरिते यानी प्रिय हो जाता है। देवकी के विवाह में कंस बहुत प्रसन्न था। दहेज का सामान अपने रथ में रखकर बहन और बहनोई को विदा कर रहा था। तभी आकाशवाणी हुई कि मूर्ख कंस, जिस बहन के विवाह में तू इतना प्रसन्न है, इसका आठवां पुत्र तेरी मृत्यु का कारण बनेगा। कंस रथ से कूदता है, बहन को नीचे गिराता है और मारने का प्रयास करता है। यह प्रसंग बताता है कि कितनी जल्दी इंसान बदल जाता है? रिश्तों में स्थायित्व भले ही न रखें पर आत्मीयता रखें, अन्यथा दु:खी ही पाए जाएंगे।
इंदौर जिले के ग्रामीण इलाकों में तेंदुओं की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। महू से लेकर देवगुराड़िया तक फैले इस खतरे ने स्थानीय निवासियों में डर का माहौल बना दिया है। देवगुराड़िया के पास सनावदिया गांव में वन विभाग ने एक तेंदुए को पिंजरे में फंसा कर रेस्क्यू किया और चिड़ियाघर भेज दिया। वहीं महू के आर्मी वॉर कॉलेज परिसर में तेंदुए की गतिविधियां अभी भी जारी हैं। पिछले एक सप्ताह में तेंदुओं ने कई बकरों-बकरियों को अपना शिकार बनाया, जिससे गांववासियों में दहशत फैल गई। पिछले सात दिनों से देवगुराड़िया और सनावदिया के आसपास तेंदुओं की मौजूदगी की लगातार खबरें मिल रही थीं। इस दौरान वन विभाग ने तेंदुओं के मूवमेंट पर नजर रखी और तेंदुए के शिकार के प्रमाण मिलने के बाद एक सप्ताह पहले पिंजरा लगाया। आज सुबह तेंदुआ उसमें फंसा हुआ मिला, संभवतः यह देर रात ही कैद हो गया था। विधायक मधु वर्मा ने भी इस मामले में अधिकारियों से बात की। रेस्क्यू टीम के प्रभारी और रालामंडल रेंजर योगेश यादव ने कहा तेंदुए को स्वास्थ्य परीक्षण के लिए कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय (चिड़ियाघर) भेज दिया गया है। हमारी टीम ने तुरंत कार्रवाई की और इसे सुरक्षित स्थानांतरित कर दिया। रेस्क्यू ऑपरेशन सुबह करीब 7 बजे पूरा हुआ, और तेंदुए को चिड़ियाघर ले जाया गया। गांववासियों ने राहत की सांस ली, लेकिन वे अब भी सतर्क हैं। एक स्थानीय निवासी ने बताया पिछले हफ्ते से रात में बाहर निकलना मुश्किल हो गया था। अब उम्मीद है कि इलाका सुरक्षित हो जाएगा। महू आर्मी वॉर कॉलेज में तेंदुए का खतरा बरकरार दूसरी ओर, महू के आर्मी वॉर कॉलेज परिसर में तेंदुए का मूवमेंट पिछले तीन दिनों से जारी है। महू वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, कॉलेज के कर्मचारियों ने तेंदुए को परिसर में घूमते हुए देखा। यह न सिर्फ कैमरों में कैद हुआ, बल्कि कर्मचारियों ने इसे झाड़ियों में घुसते हुए अपनी आंखों से देखा। महू वन विभाग ने तुरंत एक्शन लेते हुए इलाके में तीन नाइट विजन ट्रैप कैमरे लगाए हैं। अधिकारियों ने बताया, “आज इन कैमरों को खोलकर तेंदुए की लोकेशन की जांच की जाएगी। हमारी टीम 24 घंटे मॉनिटरिंग कर रही है।” परिसर बड़ा, जंगली इलाका पास आर्मी वॉर कॉलेज के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “परिसर बड़ा है और जंगली इलाका पास में है, इसलिए तेंदुए का आना स्वाभाविक है। लेकिन सुरक्षा के लिए वन विभाग की मदद जरूरी है।” वन विभाग का कहना है कि महू क्षेत्र में तेंदुओं की संख्या बढ़ रही है, जो शहर की सीमाओं तक पहुंच रही है। क्या है वजह और आगे की चुनौतियां इंदौर जिले के जंगलों से सटे इलाकों में तेंदुओं का मूवमेंट बढ़ने की वजह मानवीय अतिक्रमण और जंगलों का सिकुड़ना माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, तेंदुए भोजन की तलाश में गांवों और शहरों की ओर रुख कर रहे हैं। वन विभाग अब और पिंजरे लगाने की योजना बना रहा है, साथ ही स्थानीय लोगों को जागरूक करने के लिए कैंप आयोजित करेगा।
Indian News 20 द्वारा इस दिन पोस्ट की गई रविवार, 13 दिसंबर 2020
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