हम निर्माणाधीन मार्ग पर जब गुजरते हैं तो कुछ साइन बोर्ड हमें बताते हैं कि यहां डायवर्शन है, मुड़ जाइए। एक बोर्ड भी लगा होता है- वर्क इन प्रोग्रेस। कभी-कभी तो चिढ़ भी होती है कि कैसी सड़क कर दी। फिर ध्यान आता है कुछ समय बाद बहुत अच्छी सड़क हो जाएगी, तभी तो निर्माण हो रहा है। जीवन के राजपथ पर भी सदैव निर्माण चलता रहता है। जो लोग ग्रोथ माइंडसेट के होते हैं, वो एक बात हमेशा समझाते रहते हैं खुद को कि हम सीख रहे हैं। जिस दिन हम यह मान लेते हैं कि हमने सीख लिया, यह गलतफहमी बड़ी महंगी पड़ती है। अंतिम सांस तक कुछ न कुछ सीखना है। अब इसके लिए एक सुंदर प्रयोग है। हम खुद से भी बहुत बातें करते हैं। अकेले में बैठे-बैठे सवाल-जवाब चलते हैं। तो एक प्रयास करिए कि हमारी जो निजी बातचीत होती है, उसकी भाषा बहुत मीठी हो। दूसरों के प्रति आदरपूर्ण हो। जब हम किसी और से बात करें और मन ही मन कर रहे हों तो खूब आदरपूर्ण करें। जो अपनी निजी बातचीत को, उसके शब्दों को गरिमामय बनाएगा, उसे जीवन भर सीखने में दुविधा नहीं होगी।
वॉशिंगटन, 3 जून (आईएएनएस)। मेडिकेयर और मेडिकेड सर्विसेज के प्रशासक डॉ. मेहमत ओज ने बताया कि ट्रंप प्रशासन देश के भीतर दवाओं के उत्पादन को बढ़ाने पर जोर दे रहा है। इसके तहत अमेरिका में दवा बनाने वाली कंपनियां तेजी से निवेश कर रही हैं।
भास्कर न्यूज | अंबिकापुर तुलसी साहित्य समिति ने मालवीय भवन में सरस कवि-सम्मेलन कराया। अध्यक्षता वरिष्ठ कवि बीडी लाल ने की। मुख्य अतिथि पूर्व व्याख्याता सच्चिदानंद पांडेय रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ गीतकार देवेंद्रनाथ दुबे, पूर्णिमा पटेल, चंद्रभूषण मिश्रा मंच पर रहे। संस्था की कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. माधुरी जायसवाल ने सरस्वती-वंदना प्रस्तुत की। उन्होंने हर स्वर में आशीष रहने की प्रार्थना की। तिमिर दूर करने की कामना रखी। जग रोशन करने का संदेश दिया। बीडी लाल ने श्रीकृष्ण से मन-मंदिर में ज्योति जगाने की विनती की, वहीं विरह-अनल का चित्र खींचा। उन्होंने नैनों में रसधार बहाने की बात कही। संस्था अध्यक्ष कवि मुकुंदलाल साहू ने ग्रीष्म की भयावहता पर दोहा सुनाया। गर्मी से मुस्कान छिनने की बात कही। अरमान झुलसने का दर्द रखा। कवयित्री व लोकगायिका पूर्णिमा पटेल ने स्मृति-गीत सुना श्रोताओं को भाव-विभोर किया। गीत कवि कृष्णकांत पाठक ने बादल बनने की तमन्ना रखी। नफरत के शहर में प्रेम-बूंद बरसाने की कल्पना की। देवेंद्रनाथ दुबे ने इंसानों में इंसानियत घटने पर दुख जताया। मीठी बोली के पीछे दुश्मनी की छाया का संकेत दिया। कवि संतोष दास ‘सरल’ ने हमदर्द की तलाश पर गीत सुना दिल का दर्द बांटने की बात कही। युवाकवि अमित ‘प्रेम’ ने प्रेयसी के बिना जीवन को गमों से भरा बताया। अजय सागर ने वियोग असह्य होने की पीड़ा रखी। राजेश पांडेय ‘अब्र’ ने सर्वत्र दुखों की व्यापकता का चित्रण किया। आभार मुकुंदलाल साहू ने जताया। इस दौरान केके त्रिपाठी, दुर्गाप्रसाद श्रीवास्तव, सूर्यकांत दुबे, पेंशनर्स समाज के जिलाध्यक्ष हरिशंकर सिंह सहित बड़ी संख्या में काव्यप्रेमी मौजूद रहे। कवियों ने जागरूकता और राष्ट्रप्रेम का दिया संदेश युवा कवयित्री अंजू प्रजापति ने कर्मवान, विचारशील मनुष्यों को अमर बताया। आचार्य दिग्विजय सिंह तोमर ने आजादी के बाद भी प्रशासन की यथास्थिति पर प्रहार करते हुए अंग्रेजी मानसिकता का जिक्र किया। अंबरीष कश्यप ने जीवन जीने की सही दृष्टि पर कविता सुनाई। वहीं आत्मसम्मान गिरने की चेतावनी दी। श्यामबिहारी पांडेय ने ओजस्वी गीत से युवाओं को जगाया। भारत की गौरवगाथा सुनाने का आह्वान किया। चंद्रभूषण मिश्र ‘मृगांक’ ने चेहरे की स्मृति से जीवन-शैली बदलने की बात कही। रामलाल विश्वकर्मा ने राम, अवध, मर्यादा का स्मरण कराया। जेपी चौबे ने भी प्रतिनिधि रचना का प्रभावी वाचन किया।
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