मध्य प्रदेश के इंदौर में हुए भीषण अग्निकांड में मृत आठ लोगों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट डॉक्टरों ने पुलिस को सौंप दी। इस मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस जिसे बच्चे का शव समझकर पोस्टमार्टम के लिए लाई थी, वह सोफे का फोम निकला है।
प्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों को लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ट्वीट कर कहा कि सरकार की लापरवाही के कारण साइबर अपराधियों ने चार साल में 1054 करोड़ रुपये ठग लिए, लेकिन रोकथाम के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई। सिंघार ने कहा कि मध्य प्रदेश साइबर अपराधियों के लिए “स्वर्ग” बनता जा रहा है। रोजाना सैकड़ों लोग फर्जी कॉल, मैसेज और डिजिटल अरेस्ट जैसे तरीकों से ठगे जा रहे हैं, लेकिन अपराधियों को पकड़ने और सजा दिलाने में व्यवस्था कमजोर साबित हो रही है। उन्होंने बताया कि 1 मई 2021 से 13 जुलाई 2025 के बीच राज्य में 1,054 करोड़ रुपये की साइबर ठगी हुई। यानी औसतन हर साल 263.5 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई। इसके बावजूद राज्य में न तो साइबर फॉरेंसिक डिवीजन है और न ही पर्याप्त पुलिस इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया गया है। सिंघार ने दावा किया कि संसद में दी गई जानकारी के अनुसार करीब 8 करोड़ की आबादी वाले मध्य प्रदेश में केवल एक साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन है। उन्होंने इसे बड़े राज्य के लिए अपर्याप्त बताते हुए कहा कि इससे अपराधियों को खुली छूट मिल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि ठगी गई कुल राशि में से केवल 1.94 करोड़ रुपये ही बरामद हो सके, जो कुल रकम का महज 0.18 प्रतिशत है, जबकि 99.82 प्रतिशत राशि वापस नहीं मिल पाई। वहीं NCRB 2023 रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि 2021 से 2023 के बीच 2,100 साइबर अपराध दर्ज हुए, लेकिन केवल 191 मामलों में ही दोषसिद्धि हुई, यानी सजा दर करीब 9 प्रतिशत रही। अन्य राज्यों से तुलना करते हुए सिंघार ने बताया कि उत्तर प्रदेश में 75, महाराष्ट्र में 47, बिहार में 44, तमिलनाडु में 54 और केरल में 20 साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन हैं, जबकि मध्य प्रदेश में संख्या बेहद कम है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश उन दो राज्यों में शामिल है जहां साइबर फॉरेंसिक डिवीजन तक नहीं है। दूसरा राज्य सिक्किम है। सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार की लापरवाही के कारण आम नागरिक लगातार ठगी का शिकार हो रहे हैं और अपराधियों के हौसले बुलंद हैं।
डिजिटल डेस्क, लखनऊ। यूपी में विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं, मगर प्रदेश की राजनीति अभी से गरमाने लगी है। उत्तर प्रदेश के पूर्व CM व SP पार्टी के चीफ अखिलेश यादव ने आधी आबादी को साधने के लिए बड़ा सियासी दांव चल दिया है। वह “मूर्ति देवी-मालती देवी” महिला सम्मान की शुरूआत करेंगे। बता दें, मूर्ति देवी अखिलेश की दादी और मालती देवी माँ का नाम है। जानकारी के मुताबिक, अखिलेश यादव फूलन देवी, सावित्री बाई फुले, अहिल्याबाई होल्कर, बेगम अख़्तर, महादेवी वर्मा, सरस्वती अम्माल, सरोजिनी नायडू, इस्मत चुगताई, ऊदा देवी, रानी लक्ष्मी बाई समेत अन्य विभूतियों के नाम पर 20 कैटेगरी में अवॉर्ड की शुरुआत करेंगे सीएम की RSS पदाधिकारियों के साथ बैठक अखिलेश यादव की यह स्कील चुनाव में कितनी कारगर साबित होती है यह तो आने वाला समय ही बताएगा। सपा नेता के इस दाव ने राज्य सरकार भाजपा की मुश्किलें बढ़ा दी है। दूसरी तरफ खबर है कि प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ भी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में लग गए हैं। योगी आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए RSS के पदाधिकारियों के साथ मीटिंग कर रहे हैं। CM ने पदाधिकारियों से चुनाव की रणनीति बताई है। यूजीसी प्रकरण के बाद विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर यूपी की राजनीति में अचानक से ब्राह्मण बिरादरी का दखल बढ़ गया है जिससे राजनीतिक दलों खासकर विपक्षी दलों की ओर से इस पर विशेष अमल किया जा रहा है। बहुजन समाज पार्टी इस पर पकड़ बनाने में सबसे आगे दिखाई दे रही है। खबर है कि यूपी में BSP 40 से 50 सीटों पर ब्राह्मण प्रत्याशी उतार सकती है।
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