बेनूर| नारायणपुर-कोंडागांव मुख्य मार्ग निर्माण कार्य के चलते क्षेत्र में धूल की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। निर्माण एजेंसी द्वारा सड़क को खोदकर उसके ऊपर मिट्टी डाल दी गई है, जिससे भारी वाहनों के गुजरते ही सड़क पर धूल के गुब्बार उड़ने लगते हैं। कुछ ही देर में पूरा मार्ग धूल से ढंक जाता है, जिससे राहगीरों, ग्रामीणों और दुकानदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सड़क किनारे स्थित दुकानों और घरों में भी धूल भर रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण एजेंसी द्वारा नियमित रूप से पानी का छिड़काव नहीं कराया जा रहा है, जिसके कारण समस्या और गंभीर होती जा रही है। धूल के कारण बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को सांस लेने में तकलीफ सहित कई स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि निर्माण कार्य कराने वाली एजेंसी को नियमित रूप से सड़क पर पानी का छिड़काव करने के निर्देश दिए जाएं, ताकि लोगों को धूल से राहत मिल सके और दुर्घटनाओं की संभावना भी कम हो। -राजकुमार बघेल, बेनूर
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो चार दिवसीय भारत दौरे पर पहुंचे हैं। इस दौरान वे पीएम नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात करेंगे। बातचीत में ऊर्जा, व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। दौरे के दौरान क्वाड बैठक और कई कार्यक्रमों में भी शामिल होंगे।
लखनऊ में आयुर्वेद को वैज्ञानिक आधार प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) और सीएसआईआर-केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप) के बीच सहयोगात्मक अनुसंधान को लेकर शुक्रवार को सीमैप परिसर में एक बैठक आयोजित की गई। इस दौरान दोनों संस्थानों के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) तैयार करने पर चर्चा हुई। बैठक में AIIA के निदेशक प्रो. वैद्य प्रदीप कुमार प्रजापति और वैद्य विवेक अग्रवाल, साथ ही सीमैप के निदेशक डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी सहित कई वैज्ञानिक और शोधकर्ता उपस्थित थे। दोनों संस्थानों ने आयुर्वेद को आधुनिक वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। हर्बल फॉर्मूलेशन पर संयुक्त अनुसंधान किया जाएगा प्रस्तावित समझौते के तहत, आयुर्वेदिक दवाओं और हर्बल फॉर्मूलेशन पर संयुक्त अनुसंधान किया जाएगा। सीमैप प्री-क्लिनिकल परीक्षणों की जिम्मेदारी संभालेगा, जबकि क्लिनिकल ट्रायल AIIA नई दिल्ली में आयोजित किए जाएंगे। विशेष रूप से, फैटी लिवर, गट-लिवर रोग और रूमेटॉइड आर्थराइटिस जैसी बीमारियों पर शोध केंद्रित रहेगा। चर्चा के दौरान हाइड्रो-अल्कोहलिक अर्क आधारित आयुर्वेदिक उत्पादों के वैज्ञानिक प्रमाणीकरण पर भी विचार-विमर्श हुआ। इसके अतिरिक्त, इम्यूनोमॉड्यूलेटरी पैरामीटर्स और NAFLD (नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर रोग) से जुड़े मार्करों का मूल्यांकन भी प्रस्तावित क्लिनिकल ट्रायल का हिस्सा होगा। सामग्री के व्यावसायीकरण पर भी कार्य किया जाएगा दोनों संस्थानों ने दुर्लभ और विलुप्तप्राय औषधीय पौधों के संरक्षण और संवर्धन पर भी सहमति व्यक्त की। उन्नत टिश्यू कल्चर तकनीक और नियंत्रित खेती के माध्यम से इन पौधों को बढ़ावा दिया जाएगा। विंध्याचल क्षेत्र के औषधीय पौधों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सीमैप द्वारा विकसित अश्वगंधा और कालमेघ जैसी प्रमाणित संदर्भ सामग्री के व्यावसायीकरण पर भी कार्य किया जाएगा। इसके साथ ही, छात्र विनिमय और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को अनुसंधान से जोड़ने की योजना बनाई गई है।
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