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Parenting Mistakes: आपकी ये 4 आदतें बच्चे को बना रही हैं जिद्दी, तुरंत बदलें अपना तरीका

हर माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे में अच्छी आदतें आएं। लेकिन परवरिश के इस सफर में, पेरेंट्स अक्सर अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे बच्चे स्वभाव से जिद्दी होने लगते हैं। अगर आपका बच्चा भी बात-बात पर अड़ जाता है, अपनी मर्जी चलाता है, चिल्लाता है या आपकी बात बिल्कुल नहीं सुनता, तो यह थोड़ा रुककर सोचने का वक्त है। मुमकिन है कि बच्चे के इस व्यवहार के पीछे आपकी ही कुछ आदतें हों। आइए जानते हैं माता-पिता की उन आम आदतों के बारे में, जो धीरे-धीरे बच्चों को जिद्दी बना देती हैं। जरूरत से ज्यादा ऑप्शन देना आज के दौर में पेरेंट्स बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें खुश रखने के लिए हर छोटी-बड़ी चीज में चॉइस देने लगते हैं। बच्चों को चॉइस देना अच्छी बात है, लेकिन जरूरत से ज्यादा ऑप्शन बच्चों को कन्फ्यूज कर देते हैं। जब बच्चों को हमेशा अपनी मर्जी चलाने की आदत हो जाती है, तो उन्हें लगता है कि हर फैसले के मालिक वही हैं। ऐसे में जब असल जिंदगी में उन्हें अपनी पसंद की चीज नहीं मिलती, तो वे उसे बर्दाश्त नहीं कर पाते और जिद करने लगते हैं। इसे भी पढ़ें: Teenage बच्चों और Grand Parents में कैसे बैठाएं तालमेल? ये Expert Tips हर Family के काम आएंगे कोई फिक्स रूटीन न होना एक फिक्स रूटीन होने से बच्चों को पता होता है कि आगे क्या होने वाला है। इससे उनका मन शांत रहता है और वे सुरक्षित महसूस करते हैं, लेकिन जब कोई फिक्स रूटीन नहीं होता, तो बच्चे कन्फ्यूज होने लगते हैं। बिना रूटीन के जब पेरेंट्स अचानक बच्चों को कोई काम करने के लिए कहते हैं, तो बच्चे उसका विरोध करते हैं। जिसे पेरेंट्स जिद समझ लेते हैं, वह असल में बच्चे का कन्फ्यूजन या इनसेक्योरिटी होती है। एक ही बात को बार-बार दोहराना अगर आप बच्चों को एक ही बात बार-बार बोलते हैं, तो बच्चे को समझ आ जाता है कि पहली, दूसरी या तीसरी बार में काम करने की कोई जरूरत नहीं है। वे जान जाते हैं कि जब तक मम्मी या पापा गुस्सा नहीं होंगे या चिल्लाएंगे नहीं, तब तक कोई कदम उठाने की जरूरत नहीं है। यह आदत बच्चों को बात टालने और जिद्दी बनने की ट्रेनिंग देती है। इसलिए हमेशा क्लीयर ऑर्डर दें और एक बात को एक या दो बार से ज्यादा न बोलें। इसे भी पढ़ें: Summer Vacation में बच्चों को फोन से रखें दूर, ये Creative DIY Ideas खत्म करेंगे आपकी टेंशन ना कहने के बाद मान जाना यह लगभग हर घर की कहानी है। किसी खिलौने या चॉकलेट के लिए पेरेंट्स पहले तो साफ ना कह देते हैं, लेकिन जैसे ही बच्चा रोना शुरू करता है, पैर पटकता है या मॉल के बीच में तमाशा करता है, पेरेंट्स शर्मिंदगी या सिरदर्द से बचने के लिए उसे वह चीज दिला देते हैं। इससे बच्चे को समझ आता है कि अगर वह ज्यादा जोर से रोएगा या जिद करेगा, तो उसकी बात मान ली जाएगी। बच्चा इसे हथियार बनाकर अपनी सारी बातें मनवाता है।

विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में जिला पंचायतों से स्वीकृत मानचित्रों के विनियमतीकरण को मंजूरी

महायोजना विहीन क्षेत्रों में मानचित्र स्वीकृति के लिए बनेगी एसओपी अथाह ब्यूरोलखनऊ। योगी कैबिनेट ने विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में जिला पंचायतों द्वारा स्वीकृत किए गए मानचित्रों के विनियमतीकरण तथा विकास... The post विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में जिला पंचायतों से स्वीकृत मानचित्रों के विनियमतीकरण को मंजूरी appeared first on Dainik Athah .

एक्लेरियन ने लॉस एंजिल्स न्यूरोसाइंस क्लिनिक के साथ अध्ययन के लिए साझेदारी की

John Doe

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