बीजिंग, 17 अगस्त (आईएएनएस)। 14 से 19 अगस्त तक अमेरिका के ओरेगॉन राज्य से आए 22 सदस्यीय कलात्मक जिमनास्टिक और नृत्य अकादमी के प्रतिनिधिमंडल ने दक्षिण पश्चिम चीन के शीत्सांग प्रदेश का दौरा किया।
बिहार में जमीन और संपत्ति की रजिस्ट्री व्यवस्था सोमवार, 17 अगस्त से डिजिटल हो गई। सरकार ने पेपरलेस रजिस्ट्री प्रणाली लागू की है, लेकिन किशनगंज जिले के ठाकुरगंज में पहले दिन ही विरोध, असमंजस और सन्नाटा देखने को मिला। नई व्यवस्था लागू होने के बावजूद रजिस्ट्री कराने वालों की कतारें नहीं दिखीं, क्योंकि कातिब हड़ताल पर रहे। आम दिनों में रजिस्ट्री कार्यालय सुबह से ही गुलजार रहता है। जमीन की खरीद-बिक्री करने वाले लोगों के साथ कातिब, स्टांप वेंडर और दस्तावेज तैयार कराने वालों की भीड़ रहती है। हालांकि, सोमवार को कार्यालय परिसर में कुर्सियां खाली रहीं, लोगों की आवाजाही सीमित रही और सामान्य दिनों जैसी हलचल नहीं दिखी। पेपरलेस हुई रजिस्ट्री प्रक्रिया सरकार का उद्देश्य रजिस्ट्री प्रक्रिया को पारदर्शी, तेज और डिजिटल बनाना है। नई व्यवस्था के तहत डीड तैयार करने, दस्तावेजों के सत्यापन और शुल्क भुगतान जैसी प्रक्रियाएं ऑनलाइन की जाएंगी। इससे कागज पर निर्भरता कम करने और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को बढ़ावा देने का लक्ष्य है। कातिबों की हड़ताल से कामकाज प्रभावित हालांकि, ठाकुरगंज में नई व्यवस्था की शुरुआत हड़ताल के बीच हुई। डिजिटल प्रणाली के विरोध में कातिबों के हड़ताल पर चले जाने से रजिस्ट्री कार्यालय की सामान्य गतिविधियां प्रभावित रहीं। वर्षों से पारंपरिक तरीके से दस्तावेज तैयार करने वाले कातिब नई व्यवस्था में अपनी भूमिका और काम करने के तरीके को लेकर सवाल उठा रहे हैं। कातिबों का कहना है कि डिजिटल प्रक्रिया में उनकी भूमिका और तकनीकी पहलुओं को लेकर अभी पूरी तरह स्पष्टता नहीं है। जब तक इन मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक वे काम शुरू करने के पक्ष में नहीं हैं। नई प्रक्रिया समझने पहुंचे लोग सोमवार को कुछ लोग रजिस्ट्री कार्यालय पहुंचकर नई प्रक्रिया की जानकारी लेते नजर आए। लोगों ने डिजिटल रजिस्ट्री की प्रक्रिया और इसमें कातिबों की भूमिका को लेकर सवाल किए। तकनीकी प्रक्रिया में बदलाव के कारण शुरुआती दिनों में आम लोगों को भी नई व्यवस्था समझने में समय लगने की संभावना है। सरकार के सामने व्यवस्था सुचारु करने की चुनौती सरकार पेपरलेस रजिस्ट्री को डिजिटल प्रशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है। इससे रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और दस्तावेजों के सत्यापन को आसान बनाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, ठाकुरगंज में पहले दिन की स्थिति ने यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि नई तकनीकी व्यवस्था लागू करने से पहले इससे जुड़े लोगों को कितना तैयार किया गया। पहले दिन की तस्वीर से साफ है कि रजिस्ट्री की व्यवस्था तो बदल गई है, लेकिन उससे जुड़े लोग अभी इस बदलाव के साथ पूरी तरह तालमेल नहीं बैठा पाए हैं। अब नजर इस बात पर है कि सरकार और कातिबों के बीच सहमति कब बनती है और ठाकुरगंज में रजिस्ट्री का काम कब सामान्य होता है।
धनबाद इतवारी से धनबाद होकर मधुपुर जाने वाली सावन स्पेशल ट्रेन के ट्रैक पर भेड़िया...
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