18 महीने के इंतजार के बाद अगरतला-कोलकाता ‘मैत्री’ बस सेवा फिर शुरू हो गई है. यह सेवा ढाका के रास्ते त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल को जोड़ती है. नई सरकार बनने के बाद बांग्लादेश में हालात सुधरने से रास्ता साफ हुआ है. इससे यात्रियों को कम दूरी में तेज और सस्ती यात्रा का लाभ मिलेगा.
गाजियाबाद के इंदिरापुरम में यशोदा मेडिसिटी ने रोगी-केंद्रित और तकनीक आधारित स्वास्थ्य सेवाओं तहत एआई-सक्षम ICU कमांड सेंटर की शुरुआत की। यह पहल यशोदा फाउंडेशन्स के तहत एक सीएसआर कार्यक्रम है, जिसका उद्द्देश्य तकनीक और विशेषज्ञ निगरानी के माध्यम से गंभीर मरीजों की देखभाल की बेहतर बनाना। इस कमांड सेंटर का उद्घाटन केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जे. पी. नड्डा ने किया। इस मौके पर यशोदा मेडिसिटी के प्रबंधक और डॉक्टर भी मौजूद रहे। इस पहल के तहत यशोदा मेडिसिटी के बेस कमांड सेंटर को एमएमजी जिला अस्पताल, गाजियाबाद के आईसीयू से जोड़ा गया है। मरीज की हालत बिगड़ने से पहले चेतावनी यहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम के माध्यम से मरीजों से जुड़े डेटा का रियल-टाइम विश्लेषण किया जाता है। यदि मरीज की स्थिति बिगड़ने की संभावना होती है, तो सिस्टम पहले से चेतावनी देता है। इससे दूर बैठकर विशेषज डॉक्टरों द्वारा निगरानी, बेहतर समन्वय और तय चिकित्सा प्रक्रियाओं के अनुसार इलाज संभव ही पाता है। अस्पताल की सूचना प्रणालियों और बेडसाइड मॉनिटरिंग उपकरणों से जुड़कर यह एआई -सक्षम है-आईसीयू प्लेटफ़ॉर्म मरीजों के बड़े डेटा को एक ही डेशबोर्ड पर दिखाता है। इसमें मौजूद विशेष एआई इंजन मरीजों के ओखिम का आकलन करता है। साथ ही जरूरत पड़ने पर तुरंत असर्ट भेजता है। इससे ऑक्टरों को त्वरित और सही निर्णय लेने में मदद मिलती है, संसाधनों का बेहतर उपयोग होता है और इलाज की सागत कम करने में भी सहायता मिलती है। हर समय कमांड सेंटरसे निगरानी यशोदा मेडिसिटी की क्रिटिकल केयर टीम इस कमांड सेंटर से हर समय निगरानी करती है और ज़रूरत के अनुसार समय पर मार्गदर्शन करती है, जिससे वैश्विक मानकों के अनुरूप इलाज सुनिश्चित होता है। यह पहल न केवल गंभीर रूप से बीमार मरीजों के इलाज के परिणामों में सुधार लाने में सहायक है, बल्कि आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग के मरीजी के लिए उच्च गुणवत्ता वाली आईसीयू सेवाओं को अधिक सुनम और किफ़ायती बनाने में भी मदद करती है। समाज के लिए योगदान केंद्रीय मंत्रीय जेपी नड्डा ने कहा- यशोदा मेडिसिटी की एआई-सक्षम ई-आईसीयू जैसी पहले यह दिखाती है कि तकनीक के जरिये स्वास्थ्य सेवाओं को किस तरह मज़बूत किया जा सकता है। यह सीएसआर पहल गंभीर मरीजों के लिए लगातार विशेषज निगरानी और मार्गदर्शन उपलब्ध कराएगी साथ ही अन्य अस्पतालों को भी समाज के लिए योगदान देने के लिए प्रेरित करेगी। यशोदा ग्रुप के चेयरमैन और मैनेंजिंग डायरेक्टर डॉ PN अरोड़ा ने कहा हमारी हमेशा से यही सोच रही है कि हर मरीज को विश्वस्तरीय इलाज मिले। एआई-सक्षम ई-आईसीयू कमांड सेंटर के जरिये हम आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ देखरेख को अस्पताल की सीमाओं से बाहर तक पहुंचा रहे हैं। इसका उद्द्देश्य जमीनी स्तर पर काम कर रही मेडिकल टीमों को लगातार सहयोग देना है ताकि सहीसमय पर सही इलाज संभव हो सके। मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ उपासना अरोड़ा ने कहा कि आज यशोदा मेडिसिटी ने विश्व स्तरीज इलाज में अपनी पहचान देश ओर विदेशों में भी बनाई है। शुभांग अरोडा, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर ने कहा कि यह एआई-सक्षम ई-आईसीयू कमांड सेंटर हमारी उस सोच को दशीला है, जिसमें तकनीक के ज़रिये बड़े स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। 1200 बेड का अस्पताल. यशोदा मेडिसिटी दिल्ली एनसीआर में स्थित एक अत्याधुनिक क्वाटरनरी केयर अस्पताल है, यशोदा ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स 50 बीघार जमीन पर फैले इस परिसर में कुल 1,200 बेड हैं, जिनमें से पहले चरण में 635 बेड कार्यरत हैं। यहां 65 से अधिक विशेषताएं और 12 से अधिक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस हैं। यह अस्पताल आधुनिक तकनीक, हरित और डिजिटल डिजाइन तथा रोगी केंद्रित देखभाल के साथ देश के अलग अलग राज्यों और विदेश से आने वाले मरीजों के लिए बेहतर चिकित्सा सेवाएं प्रदान कर रहा है।
मंडला पुलिस ने एक विशेष अभियान के तहत लगभग 38 लाख रुपये मूल्य के 253 गुम हुए मोबाइल फोन उनके मालिकों को लौटा दिए हैं। इन मोबाइलों में कुछ ऐसे भी थे जो खराब सड़कों और अव्यवस्थित स्पीड ब्रेकरों के कारण गुम हो गए थे। यह वितरण कार्यक्रम पुलिस कंट्रोल रूम मंडला में आयोजित किया गया। मंडला निवासी सौरभ सिंगौर ने बताया कि तीन माह पहले बस स्टैंड के पीछे कॉलोनी रोड पर एक ऊंचे स्पीड ब्रेकर से गुजरते समय उनका मोबाइल गिर गया था। इसी तरह, आईटीआई निवासी समीर कटारे का मोबाइल भी लगभग छह माह पहले निर्माणाधीन सड़क पर बने गड्ढों की वजह से बाइक चलाते समय जेब से गिरकर गुम हो गया था। दोनों ने ही पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। मोबाइल वापस मिलने पर सौरभ, समीर और अन्य मोबाइल धारकों ने मंडला पुलिस की तत्परता और प्रयासों की सराहना की। कुल 253 मोबाइल फोन लौटाए गए, जिनमें थाना कोतवाली और थाना महाराजपुर क्षेत्र के 171 मोबाइल शामिल थे। इन सभी मोबाइलों की अनुमानित कीमत 38 लाख रुपये है। आमजन की सुविधा के लिए, मोबाइल का वितरण जिला मुख्यालय के साथ-साथ थाना स्तर पर भी विकेंद्रीकृत तरीके से किया जा रहा है। दूरस्थ क्षेत्रों में माइक्रोबीट अधिकारी घर-घर जाकर भी मोबाइल सुपुर्द कर रहे हैं, ताकि नागरिकों को अनावश्यक परेशानी न हो। पुलिस अधीक्षक रजत सकलेचा ने बताया कि मंडला पुलिस CEIR और NCRP पोर्टल का प्रभावी उपयोग कर रही है। साइबर डेस्क की सक्रियता और थाना स्तर पर गठित प्रशिक्षित टीमों की मदद से यह अभियान लगातार चलाया जा रहा है। पिछले दो वर्षों में मंडला पुलिस ने कुल 2767 मोबाइल फोन बरामद कर उनके वैध मालिकों को लौटाए हैं, जिनकी अनुमानित कीमत 4.15 करोड़ रुपये है। इस दौरान थाना प्रभारी कोतवाली निरीक्षक शफीक खान, थाना प्रभारी महाराजपुर जय सिंह यादव, साइबर सेल के अधिकारी-कर्मचारी, मोबाइल धारक एवं उनके परिजन तथा पत्रकार मौजूद रहे। मंडला पुलिस ने आमजन से अपील की है कि मोबाइल गुम होने पर तुरंत CEIR पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं और साइबर जागरूकता अपनाएं।
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