देहरादून में इनामुल्ला बिल्डिंग के पास अतिक्रमण हटाने को लेकर हिंदू रक्षा दल और प्रशासन के बीच गतिरोध पैदा हो गया है। संगठन के कार्यकर्ता स्वयं अतिक्रमण हटाने पहुंचे, लेकिन पुलिस ने उन्हें द्रोण चौक पर रोक दिया। हिंदू रक्षा दल ने प्रशासन पर निष्क्रियता का आरोप लगाया, जबकि प्रशासन ने कानून के दायरे में कार्रवाई की बात कही। यह घटनाक्रम शहर में अतिक्रमण और प्रशासनिक भूमिका पर बहस तेज कर रहा है।
एक बार मिली ज़िंदगी में भी इंसान काफी कुछ कर सकता है। नेता बन सकता है। सरकारी ठेकेदार भी बन सकता है। लेकिन बहुत और बड़ी कोशिशों के बिना सरकारी अफसर नहीं बन सकता। बहुत मेहनत का काम है सरकारी अफसर बनना और वो भी ऊंची कुर्सी वाला। खूब पढ़ना पड़ता है। एक बार मेहनत कर अफसर बन जाओ और मिल मिलाकर पोस्टिंग का जुगाड़ हो जाए तो ज़िंदगी वाह वाह करने लगती है। लोगों का नजरिया बदल जाता है जी। विशेषकर सुन्दर अविवाहित लड़कियों और उनके अभिभावकों का। वैसे तो आजकल लड़कियां अपना कैरियर बनाने में लगी रहती हैं, खाना पकाना सीखना तो छोड़ो, खाना खाने की सुध नहीं रहती। जीवन में खाना बहुत ज़रूरी है। कुछ सरकारी अफसरों को कुक भी दिया जाता है। बताया जाता है कि कुक एक व्यावसायिक बंदा होता है जिसे पता होता है कि कौन सी सब्जी कैसे काटी और पकाई जाती है। साहब और साहिबा का मूड संतुलित रखने के लिए क्या पकाया जाना चाहिए। उसे कुछ भी पकाने में अपना सिर और अनुभव खपाना आता है। आजकल की गृहणियों की तरह नहीं जिनके लिए खाना पकाना सीखने के लिए दर्जनों चैनल हैं और हजारों वीडियो लेकिन उन्हें समझ नहीं आता कि शाम को क्या पकाएं। महिलाओं की आपसी बातों में ख़ास विषय होता है यार समझ नहीं आ रहा कि शाम को क्या पकाएं। आजकल तो कुछ मिनट में खाना हाज़िर करवा दिया जाता है क्यूंकि अब वह ज़माना अब जा चुका जब खाना बनाना हर घर की महिलाओं को आता था वे पेट से होकर पुरूषों के दिल तक पहुंच जाती थी।इसे भी पढ़ें: हमारी किताब का विमोचन (व्यंग्य)इस सच को कई सरकारें समझती हैं, उन्हें पता है घर का खाना बढ़िया होता है। अफसरों को खाना तो अच्छा मिलना ही चाहिए इसलिए घर पर कुक भी सप्लाई किया जाता है। पत्नी की अफसरी भी खुश और बरकरार रहती है। अफसर तनाव रहित रहकर सरकार चलाने में उम्दा काम करते हैं लेकिन सभी को कुक नहीं मिलता तो पंगा होने लगता है। उनके यहां है तो हमारे यहां क्यूं नहीं। बस यहीं से जुगाड़ का पकना शुरू हो जाता है। छोटा अफसर बड़े को पटाता है और कुक रखने के लिए आउट सोर्सिंग शुरू हो सकती है। बेचारे सरकारी खजाने पर कुक भार भी बढ़ता जाता है। सरकारी अफसर क्या नहीं कर सकते, करते भी हैं, करवा भी सकते हैं। सालों साल कुक योजना पका सकते हैं। स्वादिष्ट शैली में सब पकाया और खाया जा रहा होता है लेकिन कहीं न कहीं से कमबख्त खुशबू लीक हो जाती है जो शिकायत करती है कि नियमों का मसाला प्रयोग नहीं किया गया। भारी भरकम प्रशासन संभालने वालों को अच्छा खाना मिलना ही चाहिए। यह भी ज़रूरी तो नहीं कि उनकी पत्नी ही उनके लिए खाना बनाए। व्यावसायिक कुक बड़ा महत्त्वपूर्ण काम करता है। घर का खर्च बचाता है। सभी घर वालों के स्वाद का ख्याल रखता है। सब्जी खुद लाता है। वह एक विश्वसनीय व्यक्ति जो पूरे परिवार के लिए करता है, घरवाले एक दूसरे के लिए नहीं कर सकते। कुछ लोग नहीं चाहते कि सरकारी पारिवारिक काम सुचारु रूप से चले। वे चाहते हैं कि कुछ अफसरों को छोड़कर बाकी खुद ही खाना पकाएं या फिर..। सरकारी अफसर का कुक होना आसान नहीं। - संतोष उत्सुक
विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना जल्द ही ऑनस्क्रीन रोमांस करते नजर आ सकते हैं। दोनों की अपकमिंग फिल्म का टाइटल 26 जनवरी को रिलीज होने वाला है।
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