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क्लासरूम के TV पर चले अश्लील गाने:छतरपुर PM श्री स्कूल का वीडियो वायरल, डीईओ ने दिए जांच के निर्देश

छतरपुर जिले के पीएम श्री एकीकृत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-2 में शैक्षणिक अनुशासन पर सवाल खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। स्कूल की एक कक्षा में पढ़ाई के दौरान टीवी पर फूहड़ और आपत्तिजनक गाने चलाए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। कक्षा में छात्रों के सामने चल रहे थे फूहड़ गाने वायरल वीडियो में कक्षा के भीतर छात्र-छात्राएं बैठे दिखाई दे रहे हैं। सामने लगे टेलीविजन पर आपत्तिजनक गीत चल रहे हैं, जबकि कक्षा में पढ़ाई का समय बताया जा रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद स्कूल की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ VIDEO घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने स्कूलों में शैक्षणिक अनुशासन बनाए रखने की मांग उठाई है। DEO ने दिए जांच के निर्देश मामले का संज्ञान लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) पी.के. रैकवार ने तत्काल जांच के निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और यह पता लगाया जाएगा कि कक्षा के दौरान टीवी पर इस तरह की सामग्री कैसे चलाई गई। लापरवाही मिलने पर होगी कार्रवाई डीईओ पी.के. रैकवार ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में किसी शिक्षक, कर्मचारी या अन्य जिम्मेदार व्यक्ति की लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। जांच रिपोर्ट का इंतजार फिलहाल शिक्षा विभाग पूरे मामले की जांच कर रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, इस घटना के बाद स्कूलों में डिजिटल संसाधनों के उपयोग और उनकी निगरानी को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

मॉनसून का कहर: भारत के विभिन्न हिस्सों में भारी बारिश का अलर्ट

भारत में मॉनसून का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है, जिसके चलते कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, और पहाड़ी राज्यों में मौसम की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। असम और पूर्वोत्तर भारत में बाढ़ की स्थिति गंभीर है, जहां हजारों लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं। जानें किस क्षेत्र में क्या स्थिति है और प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं।

डॉ. सुकांत मजुमदार का कॉलम:आज सीखने वाला हर बच्चा देश के कल को ही मजबूत बनाता है

जब हमारी सरकार ने 2021 में निपुण भारत मिशन की शुरुआत की, तब हमने एक ऐसा लक्ष्य निर्धारित किया, जिसे कहना तो आसान था, लेकिन हासिल करना कठिन- भारत का प्रत्येक बच्चा तीसरी कक्षा के अंत तक समझ के साथ पढ़ सके और बुनियादी गणित के प्रश्न हल कर सके। पांच वर्ष बाद उपलब्ध साक्ष्य बताते हैं कि भारत ने बुनियादी शिक्षा के क्षेत्र में एक शांत लेकिन परिवर्तनकारी बदलाव की शुरुआत कर दी है। हमने दुनिया की सबसे बड़ी स्कूली शिक्षा व्यवस्थाओं में से एक का निर्माण किया है, जिसमें 25 करोड़ विद्यार्थी, 98 लाख शिक्षक और 15 लाख विद्यालय शामिल हैं। इसके माध्यम से लगभग हर बच्चे को स्कूल तक पहुंचाया गया। लेकिन यह केवल शुरुआत थी। कई वर्षों तक बड़ी संख्या में बच्चे बिना बुनियादी साक्षरता हासिल किए ही शुरुआती कक्षाओं से आगे बढ़ते रहे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने इस कमी को ‘लर्निंग क्राइसिस’ के रूप में चिह्नित किया और निपुण भारत मिशन इसी चुनौती के समाधान के रूप में शुरू किया गया। हमने इस संकल्प के साथ संसाधन भी जोड़े और मिशन का वार्षिक आवंटन इसकी शुरुआत के समय लगभग 2,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर आज लगभग 4,800 करोड़ रुपये कर दिया गया है। शुरुआती संकेत उत्साहजनक हैं। देशभर में बुनियादी शिक्षा के क्षेत्र में चुपचाप एक बड़ा परिवर्तन आकार ले रहा है, जिसकी झलक राष्ट्रीय आकलनों और स्वतंत्र मूल्यांकनों- दोनों में दिखाई देती है। एनसीईआरटी के परख आकलन के अनुसार कक्षा 3 के विद्यार्थियों ने भाषा में औसतन 64 प्रतिशत और गणित में 60 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। इन निष्कर्षों की पुष्टि करते हुए असर-2024 की रिपोर्ट बताती है कि भारत में पिछले दो दशकों के दौरान बुनियादी शिक्षा में सबसे तेज सुधार दर्ज किया गया है। कक्षा 3 के जिन बच्चों को साधारण जोड़-घटाव करना आता है, उनका अनुपात बढ़कर लगभग 34 प्रतिशत हो गया है। अब कक्षा 3 के लगभग 23.4 प्रतिशत बच्चे सहजता से कक्षा 2 का पाठ पढ़ सकते हैं, जो 7.1 प्रतिशत अंक की वृद्धि है। फिर भी सबसे उत्साहजनक कहानी इन राष्ट्रीय औसतों के पीछे छिपी है। अब ग्रामीण भारत के बच्चे शुरुआती कक्षाओं में अपने शहरी समकक्षों से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि लड़कियां तो लड़कों से आगे हैं। हम उन बच्चों तक पहुंच रहे हैं, जिन्हें ऐतिहासिक रूप से शिक्षा के क्षेत्र में सबसे अधिक वंचना का सामना करना पड़ा, विशेषकर दूरदराज और संसाधन-विहीन क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों तक। इससे सीखने के परिणामों में लंबे समय से बनी असमानताओं को कम करने में मदद मिल रही है। इतने व्यापक स्तर पर हुई यह प्रगति केवल संयोग भर नहीं है। इसके लिए सुनियोजित, संरचनात्मक सुधार किए गए हैं। इन्होंने बुनियादी शिक्षा प्रदान करने की पूरी व्यवस्था को बदल दिया है। कम लागत वाले टीचिंग-लर्निंग मटैरियल्स यानी टीएलएम के जरिये सीखने की प्रक्रिया को अधिक रोचक और प्रभावी बनाया गया है। यूपी इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां कक्षा 1 से 3 तक के लिए व्यापक टीएलएम व्यवस्था विकसित की गई है। इसमें प्रिंट-समृद्ध कक्षाएं, वर्कबुक्स और खेल-आधारित वंडरबॉक्स शामिल हैं। जो बच्चा शुरुआती वर्षों में पढ़ना, तर्क करना और समस्याओं का समाधान करना सीखता है, वह बड़ा होकर एक सशक्त वर्कफोर्स बनता है और देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है। इसलिए बुनियादी शिक्षा विकसित भारत के हमारे दृष्टिकोण के केंद्र में है। (ये लेखक के अपने विचार हैं)

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