35 वर्षों की सेवा के बाद एमडीयू से विदा होंगे जयबाग मलिक
भारतीय टीम की पहली कोशिश होगी कि सुबह के सत्र में ही श्रीलंका के बाकी चार विकेट जल्द से जल्द हासिल कर लिए जाएं. दूसरी ओर श्रीलंका की नजर अपनी बढ़त को 100 रन के आसपास या उससे अधिक पहुंचाने पर रहेगी, ताकि भारतीय बल्लेबाजों पर कुछ दबाव बनाया जा सके. निचले क्रम के बल्लेबाजों की भूमिका अंतिम दिन काफी अहम रहने वाली है.
Most Dangerous Flood in World: नेपाल में आई बाढ़ ने हर तरफ कोहराम मचा दिया है. सैकड़ों मौते होने के बाद अब उन 750 लोगों की तलाश है जो बहते पानी में गायब हो गए. बाढ़ ने ऐसी तबाही मचाई जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है. लेकिन आज हम आपको उस सैलाब के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे दुनिया आज तक नहीं भूली. जी हां! हम बात कर रहे हैं 1931 में चीन में आई बाढ़ की. बता दें कि जून से अगस्त 1931 के बीच, मध्य और पूर्वी चीन के कई इलाकों में बाढ़ आ गई, जिसमें वुहान और नानजिंग जैसे घनी आबादी वाले शहर भी शामिल थे. अलग-अलग स्रोतों के अनुसार, इस बाढ़ में मरने वालों की संख्या 4 लाख से 40 लाख के बीच बताई जाती है. चीन में आफत के 10 साल 1920 के दशक के आखिर और 1930 के दशक की शुरुआत में चीन को बहुत खराब मौसम का सामना करना पड़ा था. 1928 से 1930 तक देश में सूखा पड़ा था. फिर 1930 की सर्दियाँ बहुत कड़ाके की थीं, जिससे पहाड़ी इलाकों में बर्फ और बर्फ की मोटी परतें जमा हो गईं. 1931 की शुरुआत में, बर्फ पिघलने लगी और बहकर यांग्त्ज़ी नदी में जाने लगी. इस इलाके में वसंत, गर्मी और पतझड़ के मौसम में पानी का स्तर बढ़ना आम बात है, लेकिन 1931 में पानी का बहाव लगातार बना रहा. निचले इलाकों में रहने वाले लोगों ने अपने घर छोड़ दिए. यांग्त्ज़ी के किनारे बसे इलाकों में जून में 600 मिमी से ज़्यादा बारिश दर्ज की गई. नदी का जलस्तर रिकॉर्ड रखे जाने के बाद से सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँच गया. Nepal Flood: नहीं देखी होगी ऐसी तबाही! परमाणु बम की तरह फूटा सैलाब, नेपाल में बिछीं इतनी लाशें; आंकड़ा जान फट जाएगा कलेजा! इंसानी मास खाने लगे थे लोग 25 अगस्त 1931 को गाओयू झील के किनारे बना बांध टूट गया. बाढ़ का पानी लगभग 1,80,000 वर्ग किलोमीटर इलाके में फैल गया, जो न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी और कनेक्टिकट को मिलाकर बने कुल क्षेत्रफल के बराबर था. बाढ़ ने बहुत सारे घरों और खेतों को बर्बाद कर दिया. यांग्त्ज़ी घाटी में लगभग 15 प्रतिशत गेहूँ और चावल की फसलें नष्ट हो गईं. बाढ़ ने अर्थव्यवस्था पर भी बुरा असर डाला क्योंकि ज़रूरी चीज़ों की कीमतें बहुत तेज़ी से बढ़ गईं. ज़मीन और अर्थव्यवस्था पर पड़े इस दबाव के कारण कई इलाकों में अकाल जैसी स्थिति पैदा हो गई. कुछ लोगों ने ज़िंदा रहने के लिए पेड़ों की छाल और जंगली घास-फूस खाई, और दूसरों ने अपने बच्चों को बेच दिया. कुछ लोग तो इंसानी मांस खाने तक पर मजबूर हो गए. विस्थापित शरणार्थी समुदायों में हैजा, खसरा और मलेरिया जैसी बीमारियाँ फैल गईं.
Indian News 20 द्वारा इस दिन पोस्ट की गई रविवार, 13 दिसंबर 2020
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