Diesel-petrol crisis deepens...many pumps dry in rural areas
भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में कैंसर मरीजों को लंबे समय से रेडिएशन सुविधा नहीं मिलने की समस्या अब समाधान की ओर बढ़ती दिख रही है। जहां अब तक जीएमसी के 15 सौ के करीब कैंसर रोगियों को सिर्फ ओपीडी सलाह लेकर एम्स या निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता था। इस स्थिति पर अब डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने स्पष्ट किया है कि जीएमसी के लिए भी डुअल लीनेक मशीन जल्द ऑर्डर की जाएगी। एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने कहा है कि प्रदेश के चार मेडिकल कॉलेजों के लिए डुअल लीनेक मशीनों के ऑर्डर हो चुके हैं और जीएमसी के लिए भी जल्द ऑर्डर जारी किए जाएंगे। अटके प्रोजेक्ट के बजट से होगा समाधान जीएमसी से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, लीनेक मशीन खरीदने के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग उस बजट का उपयोग करने की तैयारी में है, जो “रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ रेस्पिरेट्री डिजीज” प्रोजेक्ट के लिए मिला था। यह प्रोजेक्ट पिछले तीन साल से एनओसी न मिलने के कारण अटका हुआ है। ईदगाह हिल्स पर बनने वाले दो बड़े हेल्थ प्रोजेक्ट्स का भूमिपूजन 28 मई 2022 को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा किया गया था। करीब 150 करोड़ रुपए की लागत वाले इन प्रोजेक्ट्स पर आज तक काम शुरू नहीं हो सका। कारण यह रहा कि निर्माण से पहले एयरपोर्ट अथॉरिटी और आर्मी से आवश्यक एनओसी नहीं ली गई थी। आपत्तियों के बाद ठेकेदार बिना काम शुरू किए ही लौट गए और प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया। राजधानी के मेडिकल कॉलेज में वर्तमान में यह स्थिति राजधानी के मेडिकल कॉलेज में हर महीने 1500 से ज्यादा कैंसर मरीज इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। जिन्हें सिर्फ सलाह मिल रही है। वजह यह है कि कोबाल्ट मशीन सालों से खराब है, ब्रेकी थेरेपी यूनिट भी बंद पड़ी है और डुअल एनर्जी लीनेक मशीन अब तक ऑर्डर नहीं हुई। नतीजा यह कि मरीजों को रेडिएशन के लिए एम्स या निजी कैंसर अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। स्थिति इतनी गंभीर है कि छात्रों को भी क्लिनिकल एक्सपोजर नहीं मिल पा रहा। जबकि दावा है कि नया रेडिएशन बंकर तैयार है और जल्द 25 करोड़ की हाईटेक यूनिट शुरू होगी। बता दें, पुरानी कोबाल्ट मशीन वर्षों से खराब पड़ी है और अब उसे डिकमीशन करने की तैयारी चल रही है। वहीं ब्रेकी थेरेपी मशीन भी पिछले एक साल से बंद है। ऐसे में सर्जरी होने के बाद भी मरीजों को रेडिएशन के लिए अन्य संस्थानों में भेजना पड़ता है। वहीं, जीएमसी की डीन डॉ. कविता एन सिंह ने कहा कि बंकर तैयार है और जल्द ही मशीनें इंस्टॉल की जाएंगी। एम्स या निजी अस्पताल ही मरीजों के पास विकल्प रेडिएशन की जरूरत वाले मरीजों को या तो एम्स या निजी कैंसर अस्पतालों में जाना पड़ रहा है। एम्स में पहले से भारी भीड़ है, जिससे लंबी वेटिंग का सामना करना पड़ता है। यदि मरीज निजी अस्पताल का रुख करता है, तो उसे डेढ़ से दो लाख रुपए तक का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह बड़ा संकट है। छात्रों को नहीं मिल रहा मरीजों का अनुभव स्थिति का असर मेडिकल शिक्षा पर भी पड़ रहा है। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने पिछले सत्र में जीएमसी की ऑन्कोलॉजी की चारों पीजी सीटों की मान्यता रद्द कर दी थी। बाद में इस सत्र में सीटें बहाल की गईं, क्योंकि कॉलेज प्रशासन ने जल्द नई लीनेक मशीन स्थापित करने का आश्वासन दिया था। मशीन अब तक ऑर्डर नहीं होने से पीजी छात्रों को रेडिएशन थेरेपी का व्यावहारिक अनुभव नहीं मिल पा रहा। हमीदिया अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि इस संबंध में प्रबंधन को पत्राचार के जरिए अवगत कराया गया है। पांच कॉलेजों में मशीन, जीएमसी पीछे प्रदेश के पांच मेडिकल कॉलेजों के लिए डुअल लीनेक मशीनें प्रस्तावित थीं। जानकारी के अनुसार, चार अन्य कॉलेजों के लिए मशीनों के ऑर्डर जारी हो चुके हैं, लेकिन गांधी मेडिकल कॉलेज के लिए अब तक ऑर्डर नहीं हुआ। यह स्थिति राजधानी के सबसे बड़े सरकारी मेडिकल कॉलेज के लिए चिंता का विषय है। तैयार है हाईटेक रेडिएशन बंकर दूसरी ओर, जीएमसी और हमीदिया अस्पताल प्रशासन का दावा है कि कैंसर उपचार की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। रेडिएशन बंकर पूरी तरह तैयार है और एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड (AERB) के मानकों के अनुसार बनाया गया है। यह बंकर तीन मीटर मोटी ठोस कंक्रीट की दीवारों और विशेष शील्डिंग से तैयार किया गया है, ताकि हाई एनर्जी रेडिएशन सुरक्षित रूप से नियंत्रित किया जा सके। आसपास की दीवारें भी डेढ़ मीटर मोटी हैं। जल्द ही AERB की टीम निरीक्षण करेगी और हरी झंडी मिलने के बाद मशीन इंस्टॉल की प्रक्रिया शुरू होगी। 25 करोड़ की डुअल एनर्जी लीनेक यूनिट हमीदिया अस्पताल में करीब 25 करोड़ रुपए की लागत से आधुनिक डुअल एनर्जी लीनेक मशीन लगाने की योजना है। यह मशीन दो प्रकार की रेडिएशन ऊर्जा के जरिए ट्यूमर पर सटीक प्रहार करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तकनीक में रेडिएशन सीधे कैंसर कोशिकाओं पर असर करता है और स्वस्थ ऊतकों को कम नुकसान पहुंचता है। पेट-सीटी और ब्रेकी थेरेपी भी प्रस्तावित सिर्फ लीनेक ही नहीं, यहां पेट-सीटी स्कैन यूनिट और नई ब्रेकी थेरेपी सुविधा भी शुरू की जाएगी। पेट-सीटी स्कैन से कैंसर की स्टेजिंग और फैलाव का सटीक पता चलेगा। यदि ये सुविधाएं शुरू होती हैं, तो भोपाल के साथ-साथ आसपास के जिलों के मरीजों को भी बड़ा लाभ मिलेगा। प्रदेश में कैंसर की गंभीर स्थिति आईसीएमआर की कैंसर रजिस्ट्री के अनुसार, मध्यप्रदेश में 1 लाख 54 हजार 567 मरीजों को तत्काल कैंसर उपचार की आवश्यकता है। भोपाल में ही करीब 4350 मरीज हैं। हर महीने प्रदेश में लगभग 3500 मौतें कैंसर के कारण हो रही हैं। ऐसे में राजधानी के प्रमुख मेडिकल कॉलेज में रेडिएशन सुविधा का अभाव न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाता है, बल्कि यह मरीजों और छात्रों दोनों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। यह भी पढ़ें... बिना NOC राष्ट्रपति से भूमिपूजन, प्रोजेक्ट अब भी ठप नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) नहीं मिलने के कारण भोपाल में लगने वाले हेल्थ से जुड़े दो मेगा प्रोजेक्ट बीते 3 साल से शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। खास बात तो यह है कि इन दोनों प्रोजेक्ट का तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों भूमिपूजन भी करा दिया गया था, लेकिन आज तक दोनों प्रोजेक्ट की एक ईंट भी नहीं रखी गई है। 28 मई 2022 को लाल परेड ग्राउंड पर आयोजित कार्यक्रम में तत्कालीन राष्ट्रपति कोविंद ने ईदगाह हिल्स पर 150 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले दो मेगा प्रोजेक्ट का वर्चुअल भूमिपूजन किया था। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि ईदगाह हिल्स पर जिस जगह ये दोनों सेंटर बनने थे, एयरपोर्ट अथॉरिटी और आर्मी से इनके निर्माण के लिए एनओसी नहीं ली गई थी। आर्मी और एयरपोर्ट अथॉरिटी की आपत्तियां आने के बाद दोनों ठेकेदार बिना काम शुरू किए ही चले गए। पढ़ें पूरी खबर...
Indian News 20 द्वारा इस दिन पोस्ट की गई रविवार, 13 दिसंबर 2020
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