स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में गुरुग्राम की रैंक पर सस्पेंस, लेकिन हवा की सेहत ने बढ़ाई चिंता
Raksha Bandhan Special Recipe: त्योहारों पर मिठाई के बिना खुशियां अधूरी लगती हैं, लेकिन बाजार की मिठाइयों में मिलावट की चिंता के चलते कई लोग घर पर ही मिठाई बनाना पसंद करते हैं. ऐसे में कोडरमा की कविता कुमारी ने दूध, छेना, चीनी और केसर से तैयार होने वाली केसर मिल्क मलाई मिठाई की आसान रेसिपी बताई है. यह मिठाई स्वाद में रसीली और मुलायम होने के साथ देखने में भी बेहद आकर्षक लगती है.
छत्तीसगढ़ में एचआईवी के साथ जीवन जी रहे 18 हजार मरीजों का वायरल लोड नियंत्रित स्तर पर आ गया है। इनमें वायरस की मात्रा अब 1000 से नीचे दर्ज की गई है। इससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने और टीबी सहित दूसरी गंभीर बीमारियों की चपेट में आने का खतरा भी कम हुआ है। मरीजों की समय पर जांच, नियमित दवा लेने और काउंसलर की ओर से उनकी सतत निगरानी किए जाने से ये संभव हुआ। पहली बार वायरल लोड के जिलेवार आंकड़ों में सुधार हुआ है। प्रदेश में एचआईवी के 36 हजार मरीजों की पहचान हुई। इनमें 33 हजार मरीजों का वायरल लोड टेस्ट किया गया है, जबकि 28 हजार का इलाज शुरू हो चुका है। जांच के अनुसार नियमित दवा लेने वाले 18 हजार मरीजों में वायरस नियंत्रित स्तर पर पहुंच गया है। पहले इनमें से ज्यादातर मरीजों का वायरल लोड करीब छह हजार तक था। डेंजर जोन से बाहर होने का मतलब... मजबूत हुई रोग प्रतिरोधक क्षमता भास्कर एक्सपर्ट -डॉ. खेमराज सोनवानी, एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के अतिरिक्त परियोजना संचालक एचआईवी मरीज की शुरुआती जांच में वायरल लोड 6000 के आसपास मिलता है। उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने लगती है। इससे निमोनिया, बार-बार डायरिया और टीबी का खतरा बढ़ता है। संक्रमण अनियंत्रित रहे तो कैंसर की आशंका बढ़ती है। नियमित दवा से वायरल लोड घटने पर रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है और दूसरी बीमारियों का खतरा घटता है। वैसे एचआईवी की पुष्टि होने पर एआरटी सेंटर के काउंसलर मरीज और उसके परिजन के संपर्क में रहते हैं। मरीज को एक महीने का डोज का स्टॉक दिया जाता है। काउंसलर निगरानी करते हैं। मरीज दवा लेने न आए तो काउंसलर परिजन से जानकारी लेते हैं। जरूरत पड़ने पर घर पहुंचकर नियमित इलाज के लिए प्रेरित करते हैं। 7 जिलों में 95% मरीजों का वायरल लोड नियंत्रित करने में काउंसलरों की भूमिका रही है। मरीजों का वायरल लोड टेस्ट हर 6 महीने में किया जाता है। जनवरी से मरीजों की निगरानी, दवा वितरण व्यवस्था कसी गई है। जिन जिलों में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ, वहां ज्यादा जांच, जल्द पहचान और मरीजों को तुरंत एआरटी से जोड़ने पर जोर है। इलाज बीच में छोड़ने वाले मरीजों की अलग से निगरानी की जा रही है। (जैसा डॉ. सोनवानी ने भास्कर रिपोर्टर मोहम्मद निजाम को बताया) सात जिलों में 95% मरीजों का वायरल लोड नियंत्रित मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, बालोद, मुंगेली, सक्ती, सारंगढ़-बिलाईगढ़, सूरजपुर और धमतरी में 95% मरीजों का वायरल लोड नियंत्रित मिला है। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में भी स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इसके अलावा बेमेतरा, दुर्ग, गरियाबंद, जांजगीर-चांपा, जशपुर, कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, कोरबा, महासमुंद, रायगढ़, रायपुर और राजनांदगांव में नियमित दवा लेने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है।
Indian News 20 द्वारा इस दिन पोस्ट की गई रविवार, 13 दिसंबर 2020
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