गर्मियों में शरीर को ठंडक और ताजगी देने के लिए प्राकृतिक और हेल्दी पेय सबसे बेहतर विकल्प होते हैं. सौंफ़ का शरबत बनाना आसान है और यह पाचन, हाइड्रेशन और प्रतिरोधक क्षमता के लिए बेहद फायदेमंद है. बच्चों से लेकर बड़े-बुजुर्ग तक सभी इसे आसानी से पी सकते हैं और गर्मी में राहत पा सकते हैं.
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छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग ने सोमवार को महिला उत्पीड़न से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान सख्त रुख अपनाया। आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में प्रदेश स्तरीय 390वीं और रायपुर जिले की 179वीं जनसुनवाई आयोजित की गई, जिसमें कई गंभीर मामलों पर विस्तृत सुनवाई हुई। आरोप लगा कि, BSP अपने पुरुष कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय मामलों की लिपापोती करता है। इस पर महिला आयोग ने BSP के शीर्ष अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। BSP को आयोग की कड़ी फटकार भिलाई स्टील प्लांट (BSP) से जुड़े मामले में आयोग ने कड़ी नाराजगी जताई। आरोप है कि, एक कर्मचारी दो महिलाओं से अवैध संबंध रखते हुए पत्नी और बच्चों को भरण-पोषण नहीं दे रहा, लेकिन BSP प्रबंधन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। आयोग ने कहा कि, सुनवाई के दौरान BSP अधिकारी भरण-पोषण दिलाने का आश्वासन देते हैं, लेकिन बाद में मामले को दबा दिया जाता है। BSP की ओर से यह तर्क दिया गया कि, कर्मचारी ने लिखित में मना कर दिया है, इसलिए वेतन से राशि नहीं दी जा सकती। इस पर आयोग ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ बताया। आयोग ने स्पष्ट किया कि इस तरह का रवैया यह संदेश देता है कि BSP में कार्यरत कर्मचारी अपनी पत्नी-बच्चों को छोड़ सकते हैं और संस्थान कोई कार्रवाई नहीं करेगा। इस पर आयोग ने BSP के शीर्ष अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। पति-पत्नी विवाद में महिला को FIR की सलाह एक केस में महिला अपने ससुराल में रहना चाहती है, लेकिन पति और ससुराल पक्ष उसे साथ रखने को तैयार नहीं है। आरोप है कि महिला पर दबाव बनाकर स्टाम्प पेपर पर लिखकर तलाक का दावा किया गया, जिसे आयोग ने अमान्य बताया। साथ ही, महिला को न तो भरण-पोषण दिया जा रहा है और न ही उसका स्त्रीधन लौटाया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि यह वैधानिक तलाक नहीं है और महिला चाहें तो सभी के खिलाफ FIR दर्ज करा सकती है। बेटियों को मिलेगा संपत्ति में हक दूसरे मामले में महिला ने अपने दिवंगत पति की संयुक्त संपत्ति में अपनी दो बेटियों के हिस्से की मांग की। देवर ने बेटियों का हक स्वीकार किया। आयोग ने निर्देश दिया कि, महिला तुरंत संपत्ति पर कब्जा ले और तहसील में नामांतरण कराए। प्रक्रिया पूरी होने के बाद आयोग को सूचना देने को कहा गया। भारत माला मुआवजा विवाद में खाते पर रोक की सिफारिश एक अन्य केस में भारत माला परियोजना के तहत करीब 2.5 एकड़ जमीन का 1.64 करोड़ रुपए मुआवजा अनावेदक के खाते में जमा है। महिला ने इसमें अपने हिस्से की मांग की। आयोग ने कलेक्टर दुर्ग को पत्र लिखकर बैंक ऑफ बड़ौदा, गंजपारा शाखा में संबंधित खाते के लेनदेन पर रोक लगाने की अनुशंसा की, ताकि सुलह प्रक्रिया पूरी हो सके। अगली सुनवाई में सभी पक्षों को उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस पर गंभीर आरोप, जांच के आदेश कबीरधाम जिले के पिपरिया थाना से जुड़े मामले में पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगे। शिकायत के अनुसार, एक आरक्षक और उसकी पत्नी (महिला आरक्षक) ने फर्जी FIR दर्ज कराकर पड़ोसी महिला, उसकी बहू और 4 माह के बच्चे को दो महीने तक जेल में डलवा दिया। आयोग ने पाया कि पुलिस अधिकारियों ने अपने ही विभाग के कर्मचारी के पक्ष में कार्रवाई की और पीड़ितों की शिकायत दर्ज नहीं की। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने छत्तीसगढ़ राज्य पुलिस जवाबदेही प्राधिकरण, शंकर नगर को विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं और एक महीने के भीतर रिपोर्ट मांगी है। साथ ही DGP को भी पुलिसकर्मियों के खिलाफ पद के दुरुपयोग पर कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी।
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