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How to Make Bhatura With Aata: गेहूं के आटे से बने भटूरे न केवल स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि ये मैदा के मुकाबले थोड़े हल्के भी होते हैं। बिना मैदा के भी आप बिल्कुल हलवाई जैसे फूले-फूले भटूरे बना सकते हैं। नोट कर लें सीHow to Make Bhatura With Aata: गेहूं के आटे से बने भटूरे न केवल स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि येक्रेट रेसिपी
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) अब सड़कों, पुल और पुलिया निर्माण के साथ-साथ मधुमक्खियों के लिए भी विशेष कॉरिडोर विकसित करेगा। छत्तीसगढ़ में इसकी शुरुआत सबसे पहले नेशनल हाईवे-53 के आरंग–सरायपाली मार्ग से की जाएगी। इसके बाद नेशनल हाईवे-30 रायपुर-धमतरी और नेशनल हाईवे-130 कटघोरा-पथरापाली मार्ग पर भी ऐसे कॉरिडोर बनाए जाएंगे। इसके लिए अलग-अलग प्रजातियों के फूलदार पौधे लगाए जाएंगे, ताकि मधुमक्खियों को पूरे साल पर्याप्त मात्रा में पराग और मधुरस मिल सके। केंद्र सरकार की ओर से इस संबंध में आदेश जारी कर दिया गया है। आदेश के बाद एनएचएआई के अधिकारियों में भी हलचल मच गई है। इसे लेकर रायपुर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में जल्द ही धमतरी, अभनपुर, रायपुर और बिलासपुर के प्रोजेक्ट डायरेक्टरों की अहम बैठक होने वाली है। एनएचएआई अधिकारियों के अनुसार आदेश के तहत इन कॉरिडोर को गांवों से औसतन 5 से 6 किलोमीटर दूर विकसित किया जाएगा, ताकि लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो। इसके लिए राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे करंज, महुआ, पलाश, बॉटल ब्रश और जामुन जैसे पेड़ों की हरित पट्टी विकसित की जाएगी। इनमें सालभर फूल देने वाले पौधे लगाए जाएंगे, जिससे मधुमक्खियों को पूरे साल पराग और मधुरस उपलब्ध हो सके। एनएचएआई की इस योजना के तहत कॉरिडोर में पेड़, झाड़ियां, जड़ी-बूटियां और घास का मिश्रण लगाया जाएगा। ऐसे पौधों को प्राथमिकता दी जाएगी जिनमें मधुरस और पराग की मात्रा अधिक होती है। पौधों का चयन इस तरह किया जाएगा कि अलग-अलग मौसम में फूल खिलते रहें और मधुमक्खियों को पूरे साल भोजन मिलता रहे। इसके अलावा राजमार्गों के किनारे स्थानीय पारिस्थितिकी के अनुकूल पेड़ लगाए जाएंगे। साथ ही ऐसी संरचनाओं को भी बढ़ावा दिया जाएगा जो मधुमक्खियों के प्राकृतिक आवास के लिए अनुकूल हों। इस पहल से न केवल मधुमक्खियों को लाभ होगा, बल्कि कृषि और बागवानी उत्पादन में भी बढ़ोतरी की संभावना है। राज्य में 3 ‘बी कॉरिडोर’ बनाए जाएंगेएनएचएआई के क्षेत्रीय कार्यालय वर्ष 2026-27 के दौरान कम से कम तीन बी कॉरिडोर विकसित करेंगे। इसके लिए देशभर में करीब 40 लाख पेड़ लगाने की योजना है, जिनमें से लगभग दो लाख पौधे छत्तीसगढ़ में लगाए जाएंगे। यह पहल पारिस्थितिक संरक्षण को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्यावरण-अनुकूल राजमार्ग विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। 6 माह की देरी से चल रहे बड़े प्रोजेक्टरायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेसवे और रायपुर-दुर्ग बाईपास का निर्माण जुलाई 2023 में शुरू हुआ था। रायपुर-विशाखापट्टनम परियोजना को सितंबर 2026 तक और रायपुर-दुर्ग बाईपास को जून 2026 तक पूरा होना है। प्रदेश के लिए दोनों प्रोजेक्ट काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के चलते ये अपने तय शेड्यूल से करीब छह महीने पीछे चल रहे हैं। हमारा लक्ष्य केवल सड़कें बनाना नहीं, बल्कि उन्हें ग्रीन हाईवे में बदलना है। यह कॉरिडोर जैव-विविधता को बढ़ावा देगा। नीम, महुआ और पलाश जैसे देशी पेड़ों से सुसज्जित ये कॉरिडोर पर्यावरण संतुलन को मजबूत करेंगे और स्थानीय कृषि को भी नई दिशा देंगे। -प्रदीप कुमार लाल, क्षेत्रीय अधिकारी, एनएचएआई
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