90 करोड़ की आधुनिक चिकित्सा मशीनें और 70 करोड़ की लागत से बन रहा भवन; डॉ. महेश शर्मा बोले- क्षेत्रवासियों The post कैलाश हॉस्पिटल में 150 करोड़ से बनेगा अत्याधुनिक कैंसर विभाग, आठ माह में शुरू होगी सेवा appeared first on GrenoNews .
राजगढ़ (धार) । विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर नवरत्न आराधना भवन उपाश्रय में श्री कृष्ण बालक-बालिका आश्रम के करीब 150 बच्चों के लिए प्रेरणादायी धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। परम पूज्य साध्वीवर्या श्री हेमेंद्र श्रीजी म. सा. आदि 5 ठाणा की प्रेरणा से आयोजित कार्यक्रम में बच्चों ने साहब जी के प्रवचन श्रवण किए और भगवान बिरसा मुंडा तथा टंट्या मामा के जीवन एवं उनके आदर्शों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की। प्रवचन के दौरान भगवान बिरसा मुंडा के जीवन, संघर्ष और समाज सुधार के कार्यों पर प्रकाश डाला गया। बच्चों को बताया गया कि भगवान बिरसा मुंडा ने अपने जीवन में अनेक अच्छे कार्य किए और समाज को व्यसनमुक्त तथा सद्मार्ग पर चलने का संदेश दिया। उनके जीवन से प्रेरणा लेते हुए बच्चों को अच्छे संस्कार, सदाचार और सत्कर्म को जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। प्रवचन में मांस एवं मदिरा त्याग का संदेश प्रवचन के दौरान मांस एवं मदिरा के सेवन से दूर रहने का संदेश देते हुए कहा गया कि समाज में व्याप्त मांस एवं मदिरा सेवन जैसी प्रथाओं को समाप्त करने के लिए जागरूकता आवश्यक है। बच्चों को बताया गया कि भगवान बिरसा मुंडा के जीवन से त्याग,संयम,साहस और समाज सुधार की प्रेरणा ली जा सकती है। भगवान बिरसा मुंडा के संघर्ष को किया याद कार्यक्रम में भगवान बिरसा मुंडा के संघर्षपूर्ण जीवन का उल्लेख करते हुए बताया गया कि उन्होंने बहुत कम आयु में अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष किया और आदिवासी समाज के अधिकारों एवं सम्मान के लिए आवाज उठाई। कम उम्र में ही उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष करते हुए जेल यातना सही और उनका जीवन समाज के लिए प्रेरणादायी बन गया। टंट्या मामा के जीवन से भी बच्चों को मिली प्रेरणा प्रवचन में मालवा-निमाड़ क्षेत्र के प्रसिद्ध जननायक टंट्या मामा के जीवन एवं उनके सिद्धांतों के बारे में भी बच्चों को जानकारी दी गई। उनके संघर्ष, साहस और समाज के प्रति समर्पण को याद करते हुए बच्चों को जीवन में अच्छे कर्म करने, सद्मार्ग पर चलने और समाज के प्रति सकारात्मक योगदान देने का संदेश दिया गया। बच्चों को दी गई प्रभावना,150 बच्चों ने लिया नवकारसी का लाभ प्रवचन के पश्चात श्री कृष्ण बालक-बालिका आश्रम के सभी बच्चों को प्रभावना दी गई। इसके बाद करीब 150 बच्चों ने नवकारसी का लाभ लिया। बच्चों की प्रभावना का लाभ जमींदार परिवार द्वारा लिया गया,जबकि नवकारसी का लाभ चातुर्मास समिति द्वारा लिया गया। विश्व आदिवासी दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम में धर्म, संस्कार,समाज सुधार और आदिवासी महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेने का सुंदर संदेश बच्चों तक पहुंचा। भगवान बिरसा मुंडा और टंट्या मामा के जीवन संघर्षों को जानकर बच्चों को सत्कर्म,सदाचार,संयम और सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिली।
शाजापुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 50 दिन की सोयाबीन फसल पर येलो मोजेक वायरस का खतरा मंडरा रहा है। कई खेतों में सोयाबीन की पत्तियां पीली पड़ने के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। कुछ स्थानों पर जड़ सड़न की समस्या भी सामने आई है। फिलहाल फसल फूल आने की अवस्था में है, ऐसे में बीमारी का प्रकोप बढ़ने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। पत्तियां पीली पड़ने से किसान चिंतित किसानों का कहना है कि यदि समय रहते बीमारी पर नियंत्रण नहीं किया गया तो पौधों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है। इससे फूल और फलियों की संख्या कम होने की आशंका है, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ सकता है। पिछले साल भी जिले में येलो मोजेक समेत अन्य समस्याओं के कारण प्रति बीघा उत्पादन 1 से 1.2 क्विंटल तक सिमट गया था। किसान रूपेश ठाकुर ने बताया कि सोयाबीन की पत्तियों में पीलापन धीरे-धीरे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि समय पर बारिश नहीं होने से फसल पर संकट और बढ़ सकता है। पीलापन सिर्फ येलो मोजेक का लक्षण नहीं कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, सोयाबीन की पत्तियों में पीलापन केवल येलो मोजेक के कारण नहीं होता। पोषक तत्वों की कमी समेत अन्य कारणों से भी पत्तियां पीली पड़ सकती हैं। हालांकि, येलो मोजेक एक गंभीर वायरल रोग है, जो मुख्य रूप से सफेद मक्खी के माध्यम से फैलता है। संक्रमण बढ़ने पर पौधों की बढ़वार रुक सकती है और फूल-फलियां कम बनने से उत्पादन प्रभावित हो सकता है। फसल की शुरुआती अवस्था में संक्रमण होने पर नुकसान अधिक होने की आशंका रहती है। विशेषज्ञों ने निगरानी की दी सलाह कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को खेतों में फसल की नियमित निगरानी करने की सलाह दी है। साथ ही रोगग्रस्त पौधों और सफेद मक्खी की स्थिति की जानकारी कृषि विभाग को देने तथा विभाग द्वारा अनुशंसित नियंत्रण उपाय अपनाने को कहा है। जुलाई में जिले में कम बारिश और अगस्त की शुरुआत में भी पर्याप्त वर्षा नहीं होने से किसानों की चिंता बढ़ी हुई है। ऐसे में फसल में बीमारी के लक्षण सामने आने से किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
Indian News 20 द्वारा इस दिन पोस्ट की गई रविवार, 13 दिसंबर 2020
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