कुणाल किशोर | जहानाबाद जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक, पारदर्शी और डिजिटल रूप से सक्षम बनाने की दिशा में चल रहे सरकारी प्रयासों को अपेक्षित सफलता नहीं मिल रही है। इससे सरकार की स्वास्थ्य क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधारात्मक अवधारणा को धरातल पर साकार में फिलहाल परेशानी हो रही है। वस्तुत: आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत सभी निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं मसलन निजी अस्पताल, दवा दुकान के थोक एवं खुदरा विक्रेता, नर्सिंग होम, क्लिनिक, डायग्नोस्टिक सेंटर, पैथोलॉजी, लैब और रेडियोलॉजी केंद्र को अनिवार्य रूप से आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन पोर्टल से जोड़ने का प्रावधान किया गया है। जानकार नई तकनीकी व्यवस्था को व्यापक जन स्वास्थ्य के हित में बता रहे हैं। जिले में लगभग डेढ़ साल पहले से इस दिशा में काम शुरू किया गया था लेकिन अब तक की स्थिति संतोषजनक नहीं रही है। गौरतलब हो कि सरकार ने आगामी 31 मार्च 2026 तक सभी स्वास्थ्य प्रदाताओं को उक्त डिजिटल प्लेटफार्म से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया था। जिले में 698 निजी स्वास्थ्य संस्थान हैं, जिसमें से अब तक 324 रजिस्टर्ड हो सके हैं। जिले में अब तक कुल मिलाकर सिर्फ 47 प्रतिशत स्वास्थ्य प्रदाताओं का ही पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन किया गया है। यह सिस्टम की महत्वपूर्ण स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रति शिथिलता की ओर इंगित कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड में दर्ज डिस्पेंसरी, क्लिनिक व पॉलीक्लिनिक की कुल संख्या 316 है। इसमें से मात्र एक निजी क्लिनिक आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के पोर्टल पर रजिस्टर्ड हो सका है। इसी प्रकार जिले में डायग्नोस्टिक सेंटर, रडियोलॉजी व पैथोलॉजिकल क्लनिकों की कुल संख्या 25 है। लेकिन पोर्टल पर सिर्फ चार का ही रजिस्ट्रेशन हो सका है। इसी प्रकार निजी हॉस्पीटल व नर्सिंग होम की रिकार्ड के अनुसार जिले में कुल संख्या 93 है, जिसमें से पोर्टल पर सिर्फ 19 का ही रजिस्ट्रेशन हो सका है। इसी प्रकार जिले में उपलब्ध कुल 330 फार्मेसी प्रतिष्ठानों में से पोर्टल पर सिर्फ 256 का ही रजिस्ट्रेशन किया जा सका है। इधर जिले में 182 सरकारी स्वास्थ्य प्रदाता हैं जिसमें सभी का पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन हो चुका है। जिले में कुल 1264962 लोगों का आभा कार्ड बनना है लेकिन अब तक मात्र 652450 का ही आभा कार्ड बन सका है। जिले में फिजियोथेरेपी सेंटरों की संख्या पांच है, जिसमें से चार का पोर्टल पर निंबंधन हो चुका है। जिला स्वास्थ्य समिति के डीपीएम खालिद हुसैन ने बताया कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के लागू होने से स्वास्थ्य सुविधाओं में पारदर्शिता, सुरक्षा और दक्षता में व्यापक सुधार होगा। उन्होने बताया कि डिजिटल व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य हर नागरिक को एक यूनिक डिजिटल हेल्थ आईडी आभा नंबर प्रदान करना है। आभा नंबर से मरीज का पूरा स्वास्थ्य इतिहास, जांच रिपोर्ट, डॉक्टर की पर्ची, दवाइयों की जानकारी और इलाज से संबंधित हर डेटा सुरक्षित रूप से डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेगा। इससे मरीजों को अस्पतालों में बार-बार फाइल, पर्ची या रिपोर्ट लेकर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। डॉक्टर एक क्लिक में मरीज का पूरा मेडिकल रिकॉर्ड देखकर और अधिक सटीक निर्णय ले सकेंगे, जिससे उपचार की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हो सकेगा। 316 में से अब तक सिर्फ एक क्लिनिक का पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन सभी संस्थानों को मिलेगी यूनिक आईडी
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