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Health Tips: आयुर्वेद के ये Golden Rules बदल देंगे आपका Daily Routine, Stress रहेगा कोसों दूर

खुद को हेल्दी रखने के लिए हम कई चीजों को फॉलो करते हैं। लेकिन खराब आदतों को छोड़ना इतना भी आसान नहीं है। हेल्दी रहने के लिए क्या करना चाहिए, जो उचित हो, यही जानलेना पर्याप्त है। आयुर्वेद एक ऐसा विज्ञान है, जो हमें सिखाता है कि आप सेहतमंद कैसे रह सकते हैं। आप अपनी लाइफस्टाइल और आयुर्वेद के बीच संतुलन बनाकर अपनी दिन को बेहतर बना सकते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको आयुर्वेद के उन नियमों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको फॉलो करने से आप खुद भी तंदुरुस्त रहेंगे और बीमारियां भी कोसों दूर रहेंगी।आयुर्वेदिक नियमदिनभर तनाव मुक्त रहने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप अपने दिन की शुरूआत जल्दी करें। इसलिए सूर्योदय से पहले बिस्तर छोड़ दें और फिर कुछ देर घर में ही वॉक करें। इससे आपकी सुस्ती दूर होगी।इसे भी पढ़ें: Health Tips: चिया सीड्स के इन फायदों को न करें Ignore, Weight Loss के अलावा पाएं Glowing Skin और दमदार एनर्जीवहीं आप सुबह ही अपनी टेबल बना लें कि आज के दिन आपको कौन-कौन से जरूरी काम करने हैं। जिससे कि तनाव आप पर हावी न हो सके। वहीं खुद की प्राथमिकता को ध्यान में रखते हुए काम करते चले जाएं। इससे शाम के समय आप खुद में बहुत अच्छा अनुभव करेंगे।बता दें कि सुबह के समय पेट साफ होने से सेहत संबंधी कई लाभ मिलते हैं। आपको हल्कापन और स्फूर्ति महसूस होती है और मन प्रसन्न होता है। वहीं दिनभर खुद को ऊर्जावान अनुभव करते हैं। इस तरह से आप अपने पूरे दिन के कामों को अच्छे से कर पाते हैं।योगासन और व्यायामआपको दिन में कुछ समय योगासन के लिए भी निकालना चाहिए। अगर संभव हो तो कम से कम रोजाना 30 मिनट योगाभ्यास करें और फिर 30 मिनट के अंतराल के बाद स्नान करना चाहिए।प्रोडक्टिविटी जरूरीअगर आप अपने काम का अच्छा रिजल्ट चाहते हैं या फिर अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाना चाहते हैं, तो जरूरी है कि आप अपने मन को केंद्रित रखना चाहिए। आपको अनावश्यक विचारों से बचना चाहिए। काम करने के दौरान मोबाइल आपका ध्यान भटकाने का काम करता है, इसलिए संभव हो तो मोबाइल को साइलेंट मोड पर रखें।पौष्टिक डाइटआपको अपनी डाइट पौष्टिक और पोषक तत्वों से भरपूर चीजों को शामिल करना चाहिए। आपकी डाइट ऐसी होनी चाहिए, जो आपको ऊर्जा देने वाला है। वहीं इतना अधिक नहीं खाना चाहिए कि आपको पूरा दिन सुस्ति आती रहे।शरीर के साथ मन को भी रखें शांतसोने जाने के दौरान अधिकतर लोगों का ध्यान सिर्फ शारीरिक विश्राम पर होता है। जबकि हमें अपने शरीर के अलावा मन के आराम पर भी पूरा ध्यान देना चाहिए। इसलिए बिस्तर पर लेटने के बाद सबसे पहले अपनी सांसों पर ध्यान केंद्रित करें।जब आप अपनी सांसों पर ध्यान केंद्रित करेंगे, तो इस दौरान सांसों को लंबा और गहरा रखने की कोशिश करें। इस प्रोसेस को करके देखिए आपको कुछ ही मिनट्स में नींद आ जाएगी और अगली सुबह जब उठेंगे, तो आप खुद को ऊर्जावान और प्रसन्न महसूस करेंगे।

दिल्ली विधानसभा में जबरदस्त हंगामा, मार्शल आउट किए गए AAP विधायक संजीव झा

दिल्ली विधानसभा के सत्र में शुक्रवार को प्रदूषण के मुद्दे पर जबरदस्त हंगामा देखने को मिला। सदन की कार्यवाही के दौरान नारेबाजी और शोर-शराबे की वजह से विधानसभा अध्यक्ष ने आम आदमी पार्टी (AAP) के दो विधायकों को सदन से बाहर निकालने का आदेश दिया।

असम से एमपी आएंगे 50 जंगली भैंसे, गैंडे का जोड़ा:बदले में असम को मिलेंगे टाइगर और मगरमच्छ, दोनों राज्यों के सीएम के बीच हुई बैठक

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने असम प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ बैठक की। इस बैठक में दोनों राज्यों के बीच वन्य जीवों के आदान-प्रदान पर सहमति बनी है। 3 साल में तीन ग्रुप में आएंगे 50 जंगली भैंसेसमझौते के तहत असम से आगामी तीन वर्षों में तीन समूहों में 50 जंगली भैंस, एक जोड़ा गेंडा और तीन कोबरा मध्यप्रदेश लाए जाएंगे। इन वन्य जीवों को प्रारंभिक रूप से वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, भोपाल में रखा जाएगा। इसके बदले मध्यप्रदेश असम को एक जोड़ा टाइगर और छह मगरमच्छ देगा। सीएम बोले- जंगली भैसों की आबादी सौ साल से पहले खत्म हुईमुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चीता पुनर्स्थापना की सफलता के बाद अब जंगली भैंसों की वापसी प्रदेश के वन्य जीव संरक्षण इतिहास में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ेगी। मध्यप्रदेश पहले ही ‘टाइगर स्टेट’ और ‘लेपर्ड स्टेट’ के रूप में देश में पहचान बना चुका है। जंगली भैंसों की आबादी प्रदेश में सौ वर्षों से अधिक पहले समाप्त हो चुकी थी और वर्तमान में देश में इनकी प्राकृतिक आबादी मुख्य रूप से असम तक सीमित है। कान्हा सबसे उपयुक्त क्षेत्र देहरादून स्थित भारतीय वन्य जीव संस्थान के वैज्ञानिक अध्ययन में यह निष्कर्ष निकला है कि कान्हा टाइगर रिजर्व जंगली भैंसों के पुनर्स्थापन के लिए सबसे उपयुक्त क्षेत्र है। अध्ययन में घास के मैदानों की गुणवत्ता, जल स्रोत, मानव हस्तक्षेप की न्यूनता और अन्य शाकाहारी जीवों के दबाव जैसे पहलुओं का मूल्यांकन किया गया। राज्य सरकार ने इस परियोजना के लिए केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण और भारत सरकार से आवश्यक अनुमतियां लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुनर्स्थापन को चरणबद्ध और सुरक्षित तरीके से किया जाएगा, ताकि प्राकृतिक प्रजनन और दीर्घकालिक संरक्षण सुनिश्चित हो सके। ‘सिल्क विलेज’ सुआलकुची पहुंचे मुख्यमंत्री, मूगा रेशम की बुनाई देखी असम प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुवाहाटी के समीप स्थित ऐतिहासिक सुआलकुची का भ्रमण किया। ‘पूर्व का मैनचेस्टर’ कहलाने वाला यह गांव विश्व-प्रसिद्ध असमिया रेशम उद्योग का केंद्र है। मुख्यमंत्री ने बुनकरों के घरों और कार्यशालाओं का अवलोकन करते हुए मूगा (सुनहरा), पैट और एरी रेशम की पारंपरिक बुनाई प्रक्रिया को करीब से देखा। उन्होंने कहा कि सुआलकुची की हथकरघा परंपरा न केवल सांस्कृतिक विरासत का उत्कृष्ट उदाहरण है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था की मजबूत रीढ़ भी है। सीएम ने वस्त्रा उद्यान देखाभ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘बस्त्रा उद्यान’ और ‘आमार सुआलकुची’ संग्रहालय का भी दौरा किया, जहां मेखला-चादर, साडियां, कुर्ते और गमछों की निर्माण प्रक्रिया प्रदर्शित की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि अन्य राज्यों की श्रेष्ठ पारंपरिक कलाओं और कुटीर उद्योगों से सीख लेकर मध्यप्रदेश के हथकरघा और शिल्प क्षेत्र को भी नई दिशा दी जाएगी।

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