जिनेवा में अमेरिका-ईरान के बीच दूसरे दौर की न्यूक्लियर वार्ता बेनतीजा रही। इस बीच अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में 50 फाइटर प्लेन भेजे। इससे दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने दावा किया कि तेहरान राष्ट्रपति ट्रंप ...
Gathiya Namkeen : अक्सर शाम की चाय के वक्त कुछ चटपटा खाने की इच्छा होती है, लेकिन किचन में नमकीन ... Read more
AI in Indian Army: भारत में तकनीकी आत्मनिर्भरता और सुरक्षित डिजिटल ढांचे को मजबूत करने की दिशा में भारतीय सेना तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अपने ढांचे में शामिल कर रही है. हाल ही में आयोजित India AI Summit के दौरान सेना ने कई स्वदेशी एआई समाधान पेश किए जिनका उपयोग सैन्य और नागरिक दोनों क्षेत्रों में किया जा सकता है.शिक्षा से मिशन प्लानिंग तक AI की भूमिकासेना द्वारा प्रदर्शित प्रमुख प्रणालियों में AI Examiner शामिल है जो एक स्वचालित मूल्यांकन टूल है. यह लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम के साथ जुड़कर सबमिशन की जांच करता है और व्यवस्थित फीडबैक तैयार करता है. इससे प्रशिक्षण और शैक्षणिक प्रक्रियाओं में तेजी और पारदर्शिता लाई जा सकती है.SAM-UN नामक सिचुएशनल अवेयरनेस मॉड्यूल भू-स्थानिक डेटा और एआई विश्लेषण को जोड़कर मिशन प्लानिंग में सहायता देता है. यही सिस्टम आपदा प्रबंधन केंद्रों और स्मार्ट सिटी कंट्रोल रूम में भी उपयोगी साबित हो सकता है.सुरक्षित और स्वदेशी AI प्लेटफॉर्मEKAM एक ऐसा सुरक्षित AI-as-a-Service प्लेटफॉर्म है जो एयर-गैप्ड वातावरण में काम करता है. इसका मतलब है कि यह इंटरनेट से अलग रहकर चैट, अनुवाद, सार-संक्षेप और दस्तावेज बनाने जैसी सेवाएं देता है जबकि डेटा देश के भीतर सुरक्षित रहता है.वहीं PRAKSHEPAN को देश की पहली हाइब्रिड सैन्य जलवायु निर्णय-सहायक प्रणाली बताया गया है. यह भूस्खलन, बाढ़ और हिमस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं का अनुमान एक सप्ताह पहले तक लगा सकता है जिससे सीमावर्ती इलाकों और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को समय रहते तैयारी करने में मदद मिलती है.साइबर सुरक्षा और सूचना संरक्षण पर जोरसुरक्षा से जुड़े समाधानों में XFace नामक फेस रिकग्निशन सिस्टम, डीपफेक वीडियो पहचान तकनीक, एक्टिव मोबाइल सुरक्षा सिस्टम और मशीन लर्निंग आधारित वेब एप्लिकेशन फायरवॉल शामिल हैं. इनका उद्देश्य महत्वपूर्ण डिजिटल ढांचे को साइबर खतरों और गलत सूचना अभियानों से सुरक्षित रखना है.फील्ड ऑपरेशन और लॉजिस्टिक्स में नई ताकतऑपरेशनल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए Nabh Drishti रियल-टाइम टेलीमेट्री रिपोर्टिंग में मदद करता है. ड्राइवर थकान पहचान उपकरण, पोर्टेबल AI-in-a-Box एज कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म और एआई-सक्षम वाहन ट्रैकिंग सिस्टम जैसे टूल्स लॉजिस्टिक्स, निगरानी और मैदान में तैयारियों को बेहतर बनाते हैं.सैन्य और नागरिक दोनों के लिए फायदेमंद पहलइन सभी स्वदेशी तकनीकों से स्पष्ट है कि भारतीय सेना एक सुरक्षित, नेटवर्क-आधारित और एआई-संचालित इकोसिस्टम की ओर बढ़ रही है. यह पहल न केवल रक्षा तैयारियों को मजबूत करती है बल्कि आपदा प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और राष्ट्रीय डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है.यह भी पढ़ें:इस हफ्ते धूम मचाने आ रहा iPhone 17e! लॉन्च से पहले जान लें वो 5 बड़े अपग्रेड जो बदल देंगे गेम
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