अगर आपके चेहरे पर डलनेस नजर आ रही है, तो इसे बढ़ाने के लिए आप नारियल के तेल का इस्तेमाल कर सकती हैं। इसके साथ 2 घरेलू चीजों को मिक्स भी कर सकती हैं। आइए बताते हैं इसके स्किन पर क्या होते हैं फायदे?
प्रदेश के 200 से अधिक सरकारी कॉलेजों में 67.37 करोड़ रुपए की खरीदी गड़बड़ी सामने आई है। शिक्षा सचिव को 46 अलग-अलग मामलों की जांच से जुड़े दस्तावेजों के साथ रिपोर्ट भेजी गई। इसमें वित्तीय अनियमितताओं के स्पष्ट संकेत मिले। जांच रिपोर्ट में लिखा है कि यह पता ही नहीं है कि सामग्री खरीदी गई या नहीं। न इसका ऑडिट कराया गया, न ही उपयोगिता प्रमाण पत्र लिया। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ न एफआईआर दर्ज करने की अनुशंसा की गई और न ही किसी की जिम्मेदारी तय की गई। इसके बजाय आयुक्त ने 13 बिंदुओं का सुझाव देते हुए कहा कि भविष्य में एक ही सामग्री के लिए बार-बार राशि न दी जाए, अनावश्यक खरीदी से बचा जाए और जेम से खरीदी सुनिश्चित की जाए। यानी गड़बड़ी तो स्वीकार की, लेकिन कार्रवाई नहीं की। कोरोना में बंद कॉलेज, 10 करोड़ की खरीदारी जांच में चौंकाने वाला तथ्य यह है कि मार्च 2020 से अगस्त 2021 के बीच, जब कोरोना में कॉलेज बंद थे, तब 10.34 करोड़ की सामग्री खरीदी गई। तब छात्र कैंपस तक नहीं पहुंच पा रहे थे, पर कागजों में फर्नीचर-आईटी उपकरणों की सप्लाई दर्शाई गई। 2021-22 से 2024-25 के बीच कुल 67.37 करोड़ रुपए का बजट आवंटित हुआ, जिसमें से 96% राशि खर्च होना बताया गया है। तीन हेड में हुआ 70% खर्च: ‘तीन कोटेशन’ का खेल|बजट का 70% सिर्फ 3 मदों- फनीचर, भंडार/कच्चा माल और आईटी उपकरण पर खर्च हुआ। इसमें भी फर्नीचर पर 17 करोड़ रुपए का खर्च संदेहास्पद है, क्योंकि इसे कार्यालयीन और गैर-कार्यालयीन जैसे अलग-अलग भागों में बांटकर नियमों का उल्लंघन हुआ। स्थानीय स्तर पर 3 कोटेशन मंगाकर चहेती फर्मों को उपकृत किया गया। कई फर्में तो एक ही परिवार की निकलीं। 2021-22 से खरीद हुई है। इसकी शिकायत और जांच की मुझे जानकारी नहीं है। आपने मेरे संज्ञान में लाया है, मैं दिखवा लेता हूं कि किन महाविद्यालयों को राशि आवंटित हुई, खरीदी हुई या नहीं। इस मामले की जांच कराता हूं। -टंकराम वर्मा, मंत्री, उच्च शिक्षा विभाग ऐसा रवैया: शिकायतकर्ता मुकर गया तो दोषियों पर कार्रवाई ही टाल दी गई मामले में मोड़ तब आया जब छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन के लेटरहैड पर तत्कालीन संयोजक कमल वर्मा के नाम से पीएमओ और सीएम तक शिकायत पहुंची। इसमें आरोप था कि ग्वालियर के अरुण प्रकाशन से साठगांठ कर प्राचार्यों को तबादले की धमकी देकर किताबें और अन्य सामग्री खरीदी गई। हालांकि, वर्मा ने बाद में इस शिकायत को फर्जी बताया और इसे अपने नाम का दुरुपयोग बताया। विभाग ने इसी को आधार बनाकर जांच की दिशा मोड़ दी। सवाल है कि यदि शिकायतकर्ता फर्जी था, तो जांच में मिली गड़बड़ी और बिना ऑडिट के खर्च करोड़ों की राशि भी फर्जी हो गई? एक्सपर्ट व्यू - डॉ. सुशील त्रिवेदी, रिटायर्ड, आईएएस किसी भी स्तर पर गंभीरता नहीं बरती गई ऐसी शिकायतों की जांच के बिंदु स्पष्ट होने चाहिए। देखना चाहिए कि तय नियमों के मुताबिक खरीदी हुई या नहीं। प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं। इसकी जिम्मेदारी किस अफसर की थी, किस स्तर पर लापरवाही हुई। गड़बड़ी हुई तो शासन को कैसे और किस स्तर का नुकसान हुआ। लगता है कि मामले में किसी भी स्तर पर गंभीरता नहीं बरती गई।
कनखल थाना क्षेत्र का मामला, पुलिस ने शुरू की विवेचना
Indian News 20 द्वारा इस दिन पोस्ट की गई रविवार, 13 दिसंबर 2020
Indian News 20 द्वारा इस दिन पोस्ट की गई रविवार, 13 दिसंबर 2020
Indian News 20 द्वारा इस दिन पोस्ट की गई रविवार, 13 दिसंबर 2020
Indian News 20 द्वारा इस दिन पोस्ट की गई रविवार, 13 दिसंबर 2020
Indian News 20 द्वारा इस दिन पोस्ट की गई रविवार, 13
Indian News 20 द्वारा इस दिन पोस्ट की गई रविवार, 13 दिसंबर 2020
Indian News 20 द्वारा इस दिन पोस्ट की गई रविवार, 13 दिसंबर 2020
Indian News 20 द्वारा इस दिन पोस्ट की गई रविवार, 13
Indian News 20 द्वारा इस दिन पोस्ट की गई रविवार, 13 दिसंबर 2020
Indian News 20 द्वारा इस दिन पोस्ट की गई रविवार, 13 दिसंबर 2020
© India News 20. All Rights Reserved. Design by PPC Service